बदलता पंजाब: भगवंत मान सरकार की 16 हजार करोड़ की सड़क परियोजना से 44,920 किमी नेटवर्क तैयार

राज्य

चंडीगढ़ 
पंजाब में इस समय गांवगांव में डामर की खुशबू उठती है, JCB की आवाज़ खेतों के पार तक सुनाई देती है, ट्रैक्टरों पर गिट्टी और रोलरों की लय जैसे पंजाब का नया राग बनी हुई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सड़कों को राजनीति का शो-पीस नहीं, जनता के हक़ का विकास बनाया है. 19,373 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों पर काम पहले से चल रहा था, और अब इस रफ्तार को बढ़ाकर पंजाब को एक ही सांस में 44,920 किलोमीटर सड़क नेटवर्क पर खड़ा करने का लक्ष्य रखा गया है. यह घोषणा नहीं, पूरा रोडमैप है, जो जमीन पर बिछता हुआ दिखाई देता है.

पंजाब सरकार ने सिर्फ ठेके नहीं दिए, खेल के नियम बदल दिए. टेंडर के बदले कमीशन की पुरानी राजनीति को एक झटके में हटाकर कहा- सड़क अच्छी बनाओ, पैसा समय पर मिलेगा, लेकिन हेराफेरी की तो पंजाबी में कहावत है, एक भीठ, एक ठोक. और यह चेतावनी डंडा नहीं बनी, व्यवस्था बन गई. फ्लाइंग स्क्वायड बनाया गया, जिसका काम सड़क की गहराई, मोटाई, बिटुमेन की शुद्धता, सब कुछ वहीं पर जांचना है. वीडियो किसी गांव से उठती है, और सरकार के कदम सीधे उस जगह पहुँचते हैं. पहले सिस्टम शिकायत बाद में सुनता था, अब सिस्टम शिकायत आने से पहले सतर्क रहता है.

जांच पड़ताल के बाद काम हो रहा
कई जगह मटेरियल घटिया निकला, टेंडर रद्द हुए, अधिकारियों को निलंबित किया गया. एक खाला बिना मसाले के दीवार जैसा खड़ा किया जा रहा था, खबर सरकार तक पहुँची तो उसी वक्त काम रुकवा दिया गया. ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट कैंसल, निर्माण का नया आदेश. यह पहली बार हुआ है कि ठेकेदार दो बार सोचता है, सड़क बनानी है या सजा लेनी है. और जब ज़िम्मेदारी ठेकेदार पर हो, जब जनता निरीक्षक हो, जब मुख्यमंत्री वादा नहीं चेतावनी दे, तब सड़क की उम्र खुद मजबूत हो जाती है. यहां निर्माण के साथ पांच साल की मरम्मत की जिम्मेदारी भी ठेकेदार पर ही है, ताकि सड़क साल दो साल में थक न जाए.

गांवों में सरपंच अब सिर्फ पंचायत नहीं, सड़क का गारंटर है. सड़क अच्छी लगी तो वह हस्ताक्षर करेगा, तभी सरकार भुगतान करेगी. जनता वीडियो भेज दे, मटेरियल घटिया निकला तो मान सरकार उसी फुटेज पर कार्रवाई कर देती है. यह विकास का ऐसा मॉडल है जिसमें जनता वही नहीं, वह सुपरीक्षक है, और सरकार उसके साथ है. कोई कागज़ी प्रोजेक्ट नहीं, आंखों के सामने पिघलता डामर, धूप में काली चमकती सड़क और सफ़ेद चूने की लाइनें- यही असली रिपोर्ट कार्ड है.

पंजाब को नई दिशा देने का अभियान
तरनतारन साहिब में 17 अक्टूबर को 19,000 किलोमीटर सड़कों का उद्घाटन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, यह पंजाब के अगले दशक की दिशा थी. मंडी बोर्ड, PWD, नगर निगम, नगर परिषदें — सब अलगअलग रास्तों पर नहीं, एक बड़े लक्ष्य की ओर चल रही हैं. पंजाब का विकास अब किताबों में नहीं, गूगल मैप पर दिख रहा है. ट्रेडर को माल पहुंचाने में घंटों की बचत होती है, किसान की फसल समय पर मंडी पहुंचती है, गांव का लड़का शहर में नौकरी पर उसी दिन लौट सकता है, एम्बुलेंस अटकती नहीं, गड्ढे नहीं, रफ्तार है. सड़कें पंजाब के आत्मविश्वास की नई परिभाषा बन रही हैं.

राजनीति में भाषण बहुत हुए, योजनाएं बहुत आईं, लेकिन जो इस वक्त हो रहा है, वह एक रिकॉर्ड लिख रहा है. यह काम विपक्ष भी देख रहा है, कार्यकर्ता भी, गांव का बुजुर्ग भी और शहर का व्यापारी भी. मगर सबसे ज्यादा यह बात जनता समझ रही है कि यह सिर्फ विकास नहीं, विकास की भाषा का बदलाव है. यहां घोषणा नहीं, ज़मीन पर चलती मशीनें बोल रही हैं. पंजाब के नक्शे पर डामर की ये काली लंबी लकीरें कल की नहीं, आज की गवाही हैं. और कहानी इतनी सी है, सड़कें अब सिर्फ बन नहीं रहीं, टिक भी रही हैं. 

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