नई दिल्ली
दिल्ली में वायु प्रदूषण, विशेष रूप से धूल के कणों से होने वाला प्रदूषण, एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली सरकार एक्टिव हो गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) अब बड़े पैमाने पर मिस्ट स्प्रे तकनीक को अपना रहा है। विभाग ने 13 प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान की है, जहां 305 बिजली के खंभों पर ये सिस्टम लगाए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य इन अति-प्रदूषित क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता में सुधार करना है।
तकनीक और क्रियान्वयन की स्थिति
यह मिस्ट स्प्रे सिस्टम पानी को बेहद बारीक कणों में तोड़कर स्प्रे करता है। अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक खंभों के आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर को कम करने में प्रभावी साबित हुई है, जिसका सफलतापूर्वक उपयोग नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा पहले भी किया जा चुका है। PWD ने इस प्रोजेक्ट के लिए स्थानों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है, और टेंडर प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।
जिन हॉटस्पॉट पर यह सिस्टम लगाया जाएगा, उनमें द्वारका, जनकपुरी, नरेला, अशोक विहार, विवेक विहार, मुंडका, रोहिणी, वज़ीरपुर, ओखला, बवाना, आनंद विहार, पंजाबी बाग वेस्ट और आरके पुरम शामिल हैं। दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं।
सर्दियों से पहले मिलेगी राहत की उम्मीद
चूंकि दिल्ली में सर्दियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर हर साल बढ़ जाता है, इसलिए PWD की यह पहल समय पर राहत देने की उम्मीद जगाती है। सिस्टम को लगाने के लिए विभिन्न हॉटस्पॉट के आसपास आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, जिनमें पेड़ों की छंटाई भी शामिल है। यह अनुमान है कि यह मिस्ट स्प्रे फैसिलिटी अगले 15 से 20 दिनों में पूरी तरह से चालू हो जाएगी, जिससे राष्ट्रीय राजधानी को प्रदूषण से लड़ने में एक और टूल मिल जाएगा।
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