अमृतपाल को पैरोल की वकालत! रवनीत बिट्टू के बयान से बढ़ी सियासी गर्मी

राज्य

चंडीगढ़ 
केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने जेल में बंद खालिस्तान समर्थक व कट्टपपंथी सांसद अमृतपाल सिंह को अंतरिम पैरोल देने की सार्वजनिक रूप से वकालत की है। खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल इस समय सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत असम की डिब्रूगढ़ केंद्रीय जेल में नजरबंद हैं। बिट्टू ने मंगलवार को नई दिल्ली में संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। बिट्टू का यह रुख पंजाब में राजनीतिक जमीन तलाश रही भाजपा की रणनीतिक तैयारियों का संकेत माना जा रहा है, जहां पार्टी के पास 117 सदस्यीय विधानसभा में एक भी सीट नहीं है और ‘आप’ सरकार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है। बिट्टू की ये टिप्पणियां अमृतपाल पर उनकी पहले की तीखी आलोचना से बिल्कुल विपरीत है।

अमृतपाल ने नजरबंदी के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव खडूर साहिब से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लड़ा और जीत हासिल की। उन्हें भारत–पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित इस संसदीय क्षेत्र से 4,00,000 से अधिक वोट मिले। जून 2024 में उन्हें दिल्ली में संसद सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए चार घंटे की पैरोल मिली थी, जिसके दौरान उन्होंने ‘खालसा राज्य’ संबंधी अपने दृष्टिकोण की फिर पुष्टि की। इस दौरान उन्होंने सिख अलगाववादी विचारों का उल्लेख किया, जिसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी आलोचना की। बिट्टू ने अमृतपाल को अंतरिम पैरोल देने की मांग ऐसे समय में उठाई है जब संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए बिट्टू ने आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली पंजाब सरकार पर अमृतपाल की पैरोल अर्जी में बाधा डालने का आरोप लगाया।

उन्होंने बारामूला के सांसद अब्दुल राशिद शेख (उर्फ इंजीनियर राशिद) की मिसाल देते हुए कहा, “पंजाब सरकार जानबूझकर एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को पैरोल देने से इनकार कर रही है। अगर जम्मू–कश्मीर के सांसद इंजीनियर राशिद को गंभीर आरोपों के बावजूद सत्र में शामिल होने के लिए हिरासती पैरोल मिल सकती है, तो अमृतपाल सिंह को ऐसी सुविधा क्यों नहीं? खडूर साहिब की आवाज संसद में कौन उठाएगा?”

बिट्टू ने कहा कि राशिद आतंक–वित्त पोषण के आरोपों का सामना करते हुए अंतरिम जमानत पर सत्रों में उपस्थित हो रहे हैं। भाजपा–नीत केंद्र सरकार को विवाद से दूर रखने के प्रयास में बिट्टू ने जोर देकर कहा कि NSA के तहत पैरोल देने का फैसला राज्य सरकार के पास होता है। उन्होंने कहा, “केंद्र अमृतपाल को जेल में नहीं रख रहा है, यह पंजाब सरकार की जिम्मेदारी है। भाजपा पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। हम लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करते हैं, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।” बिट्टू का यह बयान केंद्रीय गृह मंत्रालय को सीधे आरोपों से अलग करता दिखाई देता है, जबकि आलोचकों का तर्क है कि अमृतपाल पर NSA लगाने में केंद्र और राज्य दोनों की साझा भूमिका रही थी।

पिछले बयानों से बिल्कुल उलट रुख
अमृतपाल के लिए अंतरिम पैरोल की वकालत बिट्टू के पुराने बयानों से पूरी तरह उलट है। 2024 के चुनावों के दौरान लुधियाना से भाजपा उम्मीदवार रहते हुए बिट्टू ने अमृतपाल को पंजाब की शांति के लिए खतरा बताया था। उन्होंने कहा था कि “अमृतपाल सिंह जैसे लोग पंजाब में शांति पसंद लोगों को रहने नहीं देंगे।”
बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, जिनकी 1995 में खालिस्तानी उग्रवादियों से जुड़े एक आत्मघाती हमले में हत्या हो गई थी। वे लंबे समय से खुद को अलगाववाद विरोधी मजबूत आवाज के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं।

जुलाई 2024 में लोकसभा में अमृतपाल की नजरबंदी के मुद्दे पर बिट्टू की कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के साथ तीखी बहस भी हुई थी। बिट्टू ने NSA का बचाव करते हुए इसे “कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ हथियार” बताया था। “कट्टरपंथी और खालिस्तान समर्थक संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के नेता अमृतपाल सिंह (32) को अप्रैल 2023 में पंजाब पुलिस ने हिंसा भड़काने, अलगाववाद को बढ़ावा देने और कानून–व्यवस्था भंग करने के आरोपों में, एक महीने तक चली तलाश–अभियान के बाद गिरफ्तार किया था।”

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry