नई दिल्ली
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बृहस्पतिवार शाम दो दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। पुतिन करीब चार साल बाद भारत दौरे पर आए हैं। इस अवसर पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत-रूस संबंधों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, रक्षा और सामरिक क्षेत्रों में रूस भारत का विश्वसनीय साझेदार रहा है।
थरूर ने कहा कि पुतिन का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक राजनीति अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे में भारत के लिए अपने पुराने और भरोसेमंद साझेदारों के साथ संबंधों को और मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा- यह बहुत महत्वपूर्ण दौरा है। रूस के साथ हमारा रिश्ता काफी पुराना है और हाल के वर्षों में इसकी अहमियत और बढ़ी है। तेल और गैस के क्षेत्र में रूस हमारे लिए बड़ी आपूर्ति का स्रोत रहा है। वहीं रक्षा सहयोग का महत्व हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आया, जब S-400 सिस्टम ने पाकिस्तान से दागी गई कई मिसाइलों से दिल्ली सहित हमारे शहरों की सुरक्षा की।
‘भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार’
शशि थरूर ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर आधारित है और रूस के साथ मजबूत संबंध किसी अन्य देश- चाहे अमेरिका हो या चीन, किसी के साथ संबंधों को प्रभावित नहीं करते। उन्होंने साफ शब्दों में कहा- भारत स्वतंत्र रूप से अपने हितों और साझेदारियों का चुनाव करता है। हमारी संप्रभु स्वायत्तता हमारी नीति की आधारशिला है। किसी को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि रूस के साथ हमारी करीबी किसी अन्य राष्ट्र के साथ संबंधों के खिलाफ जाएगी।
दौरे से संभावित समझौते और नई दिशा
आज यानी 5 दिसंबर को राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे, जिसमें रक्षा उत्पादन, व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, संस्कृति और मानवीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई अहम समझौते होने की संभावना है। थरूर ने उम्मीद जताई कि यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि अगर इस दौरे में कोई समझौते होते हैं, तो वे इस महत्वपूर्ण साझेदारी को और मजबूत करेंगे।
पूर्व राजनयिकों ने भी बताई साझेदारी की अहमियत
पूर्व भारतीय राजनयिक अरुण सिंह ने भी भारत-रूस संबंधों की निरंतर प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दशकों से मॉस्को ने राजनीतिक और रक्षा क्षेत्र में भारत का समर्थन किया है और बदलते वैश्विक परिदृश्य में भी रूस भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह दौरा भारत-रूस संबंधों में नई ऊर्जा भर सकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक ध्रुवीकरण के बीच नई साझेदारियों और संतुलित कूटनीति की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। रूसी राष्ट्रपति 5 दिसंबर तक भारत में रहेंगे और इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण वार्ताएं और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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