भोपाल
मध्य प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी में इन दिनों 'शब्दों के बारूद' ने आग लगा रखी है। आईएएस अधिकारी और अजाक्स अध्यक्ष संतोष कुमार वर्मा द्वारा ब्राह्मणों की बेटियों को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान ने अब एक ऐसे सियासी और कानूनी चक्रव्यूह का रूप ले लिया है, जिससे निकलना उनके लिए नामुमकिन लग रहा है। आलम यह है कि इस विवाद की गूंज भोपाल की फाइलों से निकलकर दिल्ली के गलियारों और बिहार विधानसभा तक पहुंच चुकी है।
क्या चली जाएगी नौकरी?
वहीं, ऐसे में कुछ लोगों को लग रहा है कि आईएएस संतोष वर्मा की नौकरी तो गई? लेकिन क्या ऐसा होने जा रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों 'शब्दों की मर्यादा' और 'नियमों की धज्जियां' उड़ती दिख रही हैं। आईएएस संतोष वर्मा के 'ब्राह्मण बेटियों' वाले विवादित बयान ने जहां दिल्ली तक हड़कंप मचा रखा है, वहीं अब सांसद जनार्दन मिश्रा की चिट्ठी ने उनकी पदोन्नति के 'फर्जीवाड़े' के आरोपों से हड़कंप मचा दिया है।
पहले भी आईएएस करते रहे हैं बखेड़ा
पहले भी कई आईएएस अलग-अलग तरह के बयान देकर राजनीतिक और सामाजिक बखेड़ा खड़े करते रहे हैं। पूर्व आईएएस शैलबाला मार्टिन ने मंदिरों के लाउडस्पीकर पर ट्वीट करके एक नया धार्मिक और सियासी बवंडर खड़ा कर दिया था। दूसरी तरफ, आईएएस लोकेश जांगिड़ ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए 9 तबादलों का जो 'दर्द' बयां किया था, उन्होंने तो सरकार की कार्यशैली पर ही सवाल दाग दिए थे। पूर्व आईएएस नियाज खान भी ब्राह्मण और मुस्लिमों लेकर सोशल मीडिया में काफी मुखर दिखते थे।
भ्रष्टाचार की बात करें तो अरविन्द जोशी और टीनू जोशी जैसे नामों ने पहले ही प्रशासनिक साख को दागदार किया है। हालांकि यह सब बयान इस तरह खराब नहीं कहे जा सकते, जितना घृणित बयान संतोष वर्मा का माना जा रहा है।
सीएम के पाले में है गेंद
संतोष वर्मा पर कार्रवाई कब होगी, यह गेंद अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के पाले में है। क्या वे इन 'विवादित रत्नों' पर कड़ी कार्रवाई कर प्रशासन की गिरती साख को बचा पाएंगे, या फाइलों के 'परीक्षण' का यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा? यह जंग अब केवल अनुशासन की नहीं, बल्कि सत्ता के इकबाल की है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
