नई दिल्ली
देश की विमानन व्यवस्था में जारी उथल-पुथल के बीच डीजीसीए (DGCA) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया। ये अधिकारी एयरलाइन की सुरक्षा, पायलट प्रशिक्षण और परिचालन अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण कामों की निगरानी करते हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स आज डीजीसीए के सामने पेश हो सकते हैं। बीते दिनों इंडिगो की भारी संख्या में उड़ानें रद्द होने का संकट गहराता गया था।
पिछले सप्ताह शुक्रवार को भारत भर में इंडिगो ने 1,600 से अधिक उड़ानें रद्द की थीं, जो अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान साबित हुआ। इस संकट का मुख्य कारण Flight Duty Time Limitations फेज-2 को सही तरीके से लागू करने में इंडिगो की विफलता के साथ-साथ क्रू रोस्टर और स्टाफ प्रबंधन में एयरलाइन का कुप्रबंधन था। सरकार ने भी एयरलाइन की योजना और प्रबंधन को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया।
जैसे-जैसे रद्द उड़ानों ने यात्रियों की यात्रा योजनाएं बिगाड़ीं, सरकार ने कई कदम उठाए। समय पर रिफंड सुनिश्चित करने के लिए सख्त समयसीमा तय की गई। अन्य एयरलाइनों को टिकट कीमतें नियंत्रित रखने का आदेश दिया गया। इसके अलावा इंडिगो को अपनी दैनिक उड़ानें 10% कम करने का निर्देश दिया गया।
पीटीआई के अनुसार, कटौती के बाद इंडिगो 1,950 उड़ानें संचालित करेगा, जिनमें लगभग 3 लाख यात्री सफर करेंगे। सामान्यत: एयरलाइन सर्दियों में करीब 2,300 उड़ानें प्रतिदिन संचालित करती है।
इससे पहले गुरुवार को DGCA अधिकारियों को सीधे इंडिगो के मुख्यालय भेजा गया ताकि वे स्थिति की लाइव निगरानी कर सकें। उसी दिन दिल्ली और बेंगलुरु हवाईअड्डों पर 200 से अधिक उड़ानें रद्द हो गईं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने संसद को बताया कि इंडिगो ने 1 दिसंबर को हुई बैठक में किसी भी समस्या का संकेत तक नहीं दिया था, जो इस संकट को और गंभीर बनाता है।
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