चंडीगढ़
हरियाणा में VIP सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला किया गया है. प्रदेश पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की जिला स्तर पर की गई रिव्यू मीटिंग में 72 VIP लोगों की सुरक्षा वापस ले ली है. यह रिव्यू पूरे प्रदेश में थ्रैट इनपुट, एक्सटॉर्शन कॉल्स के आधार पर किया गया. इस फैसले के बाद 200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को VIP ड्यूटी से हटाकर सामान्य कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर भेज दिया गया है.
DGP ओ पी सिंह ने सभी जिला पुलिस प्रमुखों को एक विस्तृत पत्र जारी किया है, जिसमें VIP सुरक्षा, आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े कई अहम निर्देश शामिल हैं. अपने पत्र में DGP ने साफ कहा कि जिन कानून पाबंद नागरिकों को वास्तव में अपराधियों से खतरा है. पुलिस उनकी पूरी जिम्मेदारी लेकर सुरक्षा सुनिश्चित करे. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे लोगों से लगातार संपर्क में रहें और उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए हथियार लाइसेंस, ट्रेनिंग, सेल्फ-डिफेंस उपायों जैसी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराएं.
प्राइवेट सिक्योरिटी को लेकर बारीकी से जांच
DGP ने प्राइवेट सिक्योरिटी को लेकर भी पुलिस अधिकारियों से बारीकी से जांच करने को कहा और CID के थ्रेट असैसमेंट के बाद ही सिक्योरिटी देने की बात कही. उन्होंने कहा कि पुलिस का असल में काम है, अपनी फोर्स को बदमाशों से भिड़ाए रखना. अगर इनको आपने कुछ ही लोगों के घरों के आगे बैठा दिया तो बाकी आबादी की सुरक्षा का घेरा कमजोर हो जाएगा. पुलिसकर्मियों को कुछ गिने-चुने लोगों की सुरक्षा में लगा दिया जाता है तो इससे आम जनता की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो जाती है, जो स्वीकार्य नहीं है.
शो-ऑफ करने वालों को किया जाए ब्लैकलिस्ट
DGP ने अपने पत्र में कहा कि अक्सर मॉल-सिनेमा, शादी-मैयत या अन्य आयोजनों में कुछ लोग पुलिस सुरक्षा का शो-ऑफ करते दिख जाते हैं. DGP ने ऐसे लोगों को ‘तिकड़मी’ बताते हुए निर्देश दिया कि उन्हें तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए. बेकार के काम में लगने का क्या मतलब है? DGP ओ पी सिंह ने पुलिस अफसरों को पत्र के जरिए कहा कि प्रदेश में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो अपराधियों को आश्रय देते हैं, आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं और फिर जान का खतरा होने का रोना रोते हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करें.
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