मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल में सेवानिवृत्त कार्मिकों को मिल रहा त्वरित न्याय
पेंशनरों की समस्याओं के निस्तारण के लिए शक्ति भवन में शनिवार को लगी पेंशन अदालत
अदालत में कुल 14 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए
लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल के तहत उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त कार्मिकों के कल्याण और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में शनिवार को लखनऊ स्थित शक्ति भवन में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय पर त्रैमासिक पेंशन अदालत का आयोजन किया गया। यह पहल प्रदेश सरकार की उस संवेदनशील सोच को दर्शाती है, जिसमें सेवा निवृत्ति के बाद भी कार्मिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। पेंशन अदालत में कुल 14 प्रकरणसुनवाई के लिए रखे गए।
पेंशन अदालत का आयोजन उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष कुमार गोयल के निर्देश पर किया गया। शक्ति भवन में आयोजित इस पेंशन अदालत की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड के अपर सचिव (प्रथम) विनोद कुमार मिश्र ने की, जिसमें पावर कॉरपोरेशन और पारेषण निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पेंशन अदालत में कुल 14 प्रकरण रखे गए। इनमे से पांच प्रकरणों का त्वरित निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया। शेष का जल्द से जल्द करने के स्पष्ट निर्देश अधिकारियों को दिए गए। यह त्रैमासिक पेंशन अदालत मार्च, जून, सितम्बर और दिसम्बर में नियमित रूप से आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य किसी भी पेंशनर को अनावश्यक परेशानी से बचने के लिए है। यही मॉडल प्रदेश के सभी डिस्कॉम और केस्को में भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट संदेश है कि शासन केवल कार्यरत कर्मियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा भी सरकार की जिम्मेदारी है। पेंशन अदालत जैसी व्यवस्थाएं उत्तर प्रदेश को संवेदनशील और जवाबदेह शासन की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। पेंशन अदालत में अपर सचिव-तृतीय कैलाश चन्द्र जोशी, संयुक्त सचिव दिनेश प्रताप गुप्ता, संयुक्त सचिव अनिल कुमार, अधीक्षण अभियन्ता रजनीकान्त मिश्रा, उप सचिव राम सूरत सहित अन्य अधिकारीगण इस मौके पर मौजूद रहे।
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