मुरैना
मुरैना शहर सहित अंबाह, पोरसा कस्बों में भारी यातायात और ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात पाने के लिए 460 करोड़ रुपए की लागत से 7 पुल और 27 किमी लंबे तीन बायपास एनएचएआई बनवा रही है। मुरैना-भिंड राष्ट्रीय राजमार्ग (Morena-Bhind Highway NH-552) पर निर्माणाधीन 6.6 किमी लंबे अंबाह बायपास का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बायपास के चालू होते ही भारी वाहनो का बड़ा हिस्सा शहर में प्रवेश किए बिना बाहर से ही गुजर जाएगा, जिससे बाजार, स्कूल-कॉलेज क्षेत्र और प्रमुख चौराहों पर जाम व दुर्घटनाओ में कमी आएगी। (mp news)
ट्रैफिक दबाव घटेगा
लोनिवि के अनुसार निर्माण कार्य निर्धारित समय से तेज गति से चल रहा है और लक्ष्य रखा गया है कि अगस्त-सितंबर 2026 तक बायपास को पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया जाए। शहरवासी इसे सुरक्षित आवागमन और विकास की दिशा में एक अहम उपलब्धि मान रहे है। बायपास शुरू होने से शहरों में ट्रैफिक दबाव घटेगा और आमजन को सुगम आवागमन मिलेगा।
संरचना लगभग तैयार, फिनिशिंग कार्य जारी
बायपास निर्माण का ढांचा अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है। मिट्टी भराई, लेवलिंग, सबग्रेड, जीएसबी और डीबीएम की अधिकांश परते तैयार हो चुकी है। कई स्थानों पर पुलिया और कलवर्ट बनकर तैयार है।
डायवर्सन पर खतरे, 90 डिग्री मोड़ बने चिंता
एक ओर बायपास निर्माण (Bypaas Road) से राहत की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर निर्माणाधीन पुलों के नीचे बनाए गए डायवर्सन यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। कई स्थानों पर डायवर्सन 90 डिग्री के तीखे मोड़ पर बने हैं, जिससे आमने-सामने से वाहनों के टकराने की स्थिति बन रही है। धूल का गुबार इतना अधिक है कि चार पहिया वाहनों को दिन में भी हेडलाइट जलानी पड़ रही है। नियमों के अनुसार धूल नियंत्रण के लिए लगातार पानी का छिड़काव होना चाहिए, लेकिन अधिकांश स्थानों पर यह नहीं किया जा रहा है।
आवश्यक निर्देश दिए
बायपास के पूर्ण होने के बाद शहर को ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत मिलेगी। निर्माण कार्य में यदि कहीं भी कोई अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित इंजीनियर और ठेकेदार को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं। – रामनिवास सिकरवार, एसडीएम अंबाह
अंबाह बायपास की तेज रफ्तार
एनएच-552 पर मुरैना, अंबाह और पोरसा में करीब 27 किमी लंबे तीन बायपास और 7 पुलों का निर्माणपूरी परियोजना पर लगभग 460 करोड़ रुपए खर्च। तीनों बायपास में अंबाह बायपास की प्रगति सबसे तेज है। इंजीनियरों के मुताबिक समतल भू-भाग और भूमि उपलब्धता में कम अड्चन आने से यहां काम में आई तेजी।
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