आयुष्मान योजना पर कानूनी लड़ाई: अस्पतालों के बकाया भुगतान को लेकर हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया

राज्य

चंडीगढ़
आयुष्मान भारत हेल्थ स्कीम के तहत पैनल में शामिल अस्पतालों को पेमेंट में होने वाली देरी के मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकारों को नोटिस जारी किया है। याचिका मोहाली के रहने वाले राम कुमार ने एडवोकेट सतीश भारद्वाज के जरिये दायर की थी जिन्होंने पेमेंट में देरी से लाभार्थियों को हो रही परेशानी का हवाला दिया था।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत हेल्थ स्कीम भारत सरकार ने 2018 में प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का मुफ्त स्वास्थ्य इलाज देने के लिए शुरू की थी। इसके तहत केंद्र सरकार और राज्य 60:40 के अनुपात में खर्च उठाते हैं। पैनल में शामिल अस्पतालों को क्लेम जमा करने की तारीख से 15 दिन में (अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाया जा सकता है) पेमेंट करनी होती है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने बताया कि रीइम्बर्समेंट में समय-समय पर कई महीनों की देरी हुई है जिससे अस्पतालों को इलाज बंद करना पड़ा।
 
राम कुमार ने हाईकोर्ट से राज्यों को तय समय के भीतर पेमेंट करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार पहले आओ, पहले पाओ पेमेंट सिस्टम का पालन करती है, जबकि हरियाणा सरकार कह रही है कि उसने 30 दिन के भीतर पेमेंट क्लियर करने का फैसला किया है। यह याचिका जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद, बेंच ने प्रतिवादियों को 20 जनवरी, 2026 के लिए नोटिस जारी किया है।

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