ढाका
बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की दरिंदगी का शिकार हुए दीपू चंद्र दास के साथ ही काम करने वाले एक शख्स ने उनकी हत्या को लेकर रोंगटे खड़े देने वाली बातें बताई हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक दीपू चंद्र दास के साथ काम करने वाले शख्स ने बताया कि बांग्लादेश में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दीपू चंद्र दास की एक बेटी है। कार्यस्थल पर दीपू अकसर उपेक्षा के शिकार होते थे। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे लोग थे जिन्हें कंपनी में नौकरी नहीं मिली थी और उन लोगों ने ही उनपर ईशनिंदा के झूठे आरोप लगा दिए।
घठना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि सबसे पहले एचआर ने दीपू दास को बुलाया था। एचआर ने दीपू पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया। बाद में दीपू दास को फैक्ट्री के कर्मचारियों के हवाले कर दिया गया। भीड़ में बहुत सारे बाहरी लोग भी शामिल थे। भीड़ दीपू को उठाकर फैक्ट्री के गेट पर ले गई और फिर उनपर बेरहमी से मार पड़ने लगी।
उन्होंने बताया, फैक्ट्री के बाहर खड़ी भीड़ ने दीपू चंद्र दास को अधमार कर दिया। लोग लातों से उनके मुंह और सीने पर मार रहे थे। बहुत सारे लोग डंडों से पीट रहे थे। दीपू दास खून से लथपथ थे। फैक्ट्री के गेट पर ही यह दरिंदगी हो रही थी। दीपू को इतने में भी नहीं छोड़ा गया। दीपू की मौत के बाद उनके शव को एक किलोमीटर घसीटा गया और फिर पेड़ से लटका दिया गया। कुछ लोगों ने पेट्रोल डालकर श को आग लगा दी। अधजला शव ही जमीन पर गिर गया।
शख्स ने बताया कि मुस्लिमों की पूरी भीड़ थी और यह सब देखते हुए भी वे कुछ नहीं बोल सके। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जो दीपू का साथ देना भी चाहते थे, वे भी डर के मारे चुप थे। लोगों को डर था कि अगर उन्होंने दीपू का साथ दिया तो उनका भी वही हाल होगा। उन्होंने कहा, मुस्लिमों की भीड़ एकदम दानव बन गई थी। बांग्लादेश सरकार की तरफ से बाद में कहा गया था कि दीपू दास के खिलाफ ईशनिंदा का कोई सबूत नहीं मिला था
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