चंडीगढ़
हरियाणा की हेल्थ मिनिस्टर आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य के लोगों की हेल्थ के साथ कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क सॉल्वैंट्स और एक्सिपिएंट्स के मामले में, इंडस्ट्रियल-ग्रेड्स को अपने प्रोडक्ट्स की सेल और ट्रांसपोर्ट में नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। अगर कोई मैन्युफैक्चरर उल्लंघन करता है, तो उसका लाइसेंस कैंसिल किया जा सकता है और उसके खिलाफ लीगल एक्शन भी लिया जा सकता है।
फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन हरियाणा के स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर ललित कुमार गोयल ने कहा कि हेल्थ मिनिस्टर आरती सिंह राव की गाइडलाइंस के अनुसार पब्लिक हेल्थ को ध्यान में रखते हुए यह एडवाइजरी जारी की गई है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रियल-ग्रेड हाई रिस्क सॉल्वैंट्स और एक्सिपिएंट्स के गलत इस्तेमाल को रोकने और पब्लिक हेल्थ की सेफ्टी सुनिश्चित करने के मकसद से एक ज़रूरी एडवाइजरी जारी की गई है। यह एडवाइजरी हरियाणा स्टेट फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के ज़रिए राज्य के सभी फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स, ट्रेडर्स, इंपोर्टर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को बता दी गई है।
उन्होंने कहा कि यह निर्देश डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज़, एनफोर्समेंट डिवीज़न, भारत सरकार की 22 दिसंबर 2025 को जारी एडवाइज़री के अनुसार जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि बिना सेफ्टी के इंडस्ट्रियल-ग्रेड हाई रिस्क सॉल्वैंट्स की बिक्री पब्लिक हेल्थ के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है और इससे दवा सप्लाई की क्वालिटी और सेफ्टी पर असर पड़ता है। एडवाइज़री के अनुसार, सभी हाई रिस्क इंडस्ट्रियल सॉल्वैंट्स के कंटेनर पर उनके इस्तेमाल के लिए साफ़ और पढ़ने लायक मार्क लगाना ज़रूरी होगा। यह चेतावनी सेल्स बिल, डिलीवरी चालान और लेन-देन से जुड़े दूसरे सभी डॉक्यूमेंट्स पर भी खास तौर पर दिखाई जाएगी।
उन्होंने साफ़ किया कि हाई रिस्क सॉल्वैंट्स और एक्सिपिएंट्स की खुली बिक्री पूरी तरह से मना रहेगी। ये प्रोडक्ट्स भी सिर्फ़ ओरिजिनल, सील्ड और टैम्पर-प्रूफ कंटेनर में ही बेचे जाएंगे, जिन पर पूरी लेबलिंग और बैच-ट्रेसेबिलिटी से जुड़ी जानकारी होनी चाहिए। गोयल ने कहा कि इन निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित यूनिट्स के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस कैंसिल करना या कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार लोगों की सेहत की सुरक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देती है और फार्मा सेक्टर में क्वालिटी, ट्रांसपेरेंसी और सेफ्टी पक्का करने के लिए लगातार ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं। ये निर्देश सिर्फ़ लोगों की सेहत और सेफ्टी के हित में जारी किए गए हैं।
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