कानपुर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के वर्ष 2000 बैच के पूर्व छात्रों ने सिल्वर जुबली पुनर्मिलन समारोह के दौरान संस्थान को 100 करोड़ रुपये की अभूतपूर्व 'महा गुरुदक्षिणा' देने की घोषणा की. यह पहली बार हुआ है कि किसी एक बैच ने एक ही वर्ष में इतना बड़ा योगदान दिया है.
इस राशि का उपयोग संस्थान में 'मिलेनियम स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी' (MSTAS) की स्थापना के लिए किया जाएगा. इनमोबी और ग्लांस के संस्थापक नवीन तिवारी जैसे प्रमुख दानदाताओं के सहयोग से यह पहल भविष्य की पीढ़ी को उन्नत तकनीकी शिक्षा और शोध के अवसर प्रदान करने हेतु शुरू की गई है.
संस्थान के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने इस दान को पूर्व छात्रों और संस्थान के अटूट संबंध का प्रमाण बताया है. यह सहयोग शैक्षणिक और शोध परितंत्र को मजबूत करते हुए तकनीकी विकास के नए रास्ते खोलेगा. पिछले वर्ष भी IIT कानपुर को दाताओं से 265.24 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी स्कूल को अब तक लगभग 500 करोड़ रुपये का दान मिल चुका है. इसमें इंडिगो के संस्थापक राकेश गंगवाल का 108.7 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत योगदान भी शामिल है.
अन्य संस्थानों में भी दान की परंपरा मजबूत
पूर्व छात्रों द्वारा सहयोग की यह लहर सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं है. इसी साल 21 दिसंबर को IIT कानपुर के 1986 बैच ने मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक सुविधाओं के लिए 11 करोड़ रुपये दिए. इसके अलावा, IIT BHU को पिछले पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का दान मिला है, जिससे लाइब्रेरी और शोध केंद्र जैसे प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं. वहीं, MNNIT प्रयागराज में 1998 बैच के सहयोग से अत्याधुनिक स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर का निर्माण हो रहा है.
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad

