इंदौर की लैब रिपोर्ट में खुलासा, नलों में ‘जहर’ घुलने से 1400 लोग प्रभावित, 32 ICU में भर्ती

मध्य प्रदेश राज्य

इंदौर 
   
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की साख पर 'जहरीले' पानी का गहरा दाग लग गया है. एक ताजा लैब टेस्ट से इस बात की पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा में मची तबाही का कारण दूषित पेयजल ही था. इंदौर में डायरिया फैलने से कम से कम चार मरीजों की मौत हो गई और 1400 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं.

टेस्ट के नतीजों से यह साबित हुआ कि मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी के कुछ हिस्सों में जानलेवा पीने के पानी की सप्लाई सिस्टम है, जिसे पिछले आठ सालों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता रहा है.

इंदौर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार की गई लैब रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा इलाके में एक पाइपलाइन में लीकेज के कारण पीने का पानी दूषित हो गया था, जहां से यह बीमारी फैलने की खबर आई है. उन्होंने टेस्ट रिपोर्ट के विस्तृत नतीजे शेयर नहीं किए.

भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पीने के पानी की सप्लाई पाइपलाइन में एक ऐसी जगह पर लीकेज पाया गया, जहां एक शौचालय बना हुआ है. उन्होंने दावा किया कि इस लीकेज के कारण इलाके में पानी की सप्लाई दूषित हो गई.

अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने न्यूज एजेंसी को बताया, "हम भागीरथपुरा में पूरी पीने के पानी की सप्लाई पाइपलाइन की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि कहीं और कोई लीकेज तो नहीं है."

उन्होंने कहा कि जांच के बाद गुरुवार को भागीरथपुरा के घरों में पाइपलाइन के जरिए साफ पानी की सप्लाई की गई, हालांकि एहतियात के तौर पर लोगों को सलाह दी गई है कि वे पानी को उबालकर ही पिएं.

दुबे ने कहा, "हमने इस पानी के सैंपल भी लिए हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा है."

अब पूरे MP के लिए बनेगी SOP

भागीरथपुरा में पानी की त्रासदी से सबक लेते हुए सीनियर अफसर ने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरे राज्य के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया जाएगा.

उधर, मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर दुबे ने स्थिति का जायजा लेने के लिए भागीरथपुरा का दौरा किया.

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को भागीरथपुरा में 1714 घरों के सर्वे के दौरान 8571 लोगों की जांच की गई. उनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण दिखे, जिन्हें उनके घरों पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया.

उन्होंने बताया कि बीमारी फैलने के आठ दिनों में 272 मरीजों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 71 को अब तक डिस्चार्ज किया जा चुका है. अ

अधिकारी ने बताया कि फिलहाल 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 32 इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में हैं.

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry