भगवान सबसे ऊपर, मंदिर में किसी व्यक्ति को सम्मान देना कानूनन बाध्यकारी नहीं— HC ने किस याचिका पर कहा

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मद्रास
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि किसी भी मंदिर में किसी व्यक्ति को विशेष सम्मान मिलना कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि कोई व्यक्ति या संस्था इसे अपना कानूनी अधिकार नहीं मान सकती। इस दौरान हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा कि मंदिर में पहला स्थान हमेशा भगवान का ही होता है और भगवान से ऊपर किसी को नहीं रखा जा सकता।
 
सुनवाई के दौरान जस्टिस एस एम सुब्रमण्यम और जस्टिस सी कुमारप्पन की बेंच ने श्रीरंगम श्रीमठ अंडवन आश्रमम की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि भले ही मठों के प्रमुखों को सम्मान देने की परंपरा रही हो, लेकिन इसे कभी भी कानूनी अधिकार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मंदिर में विशेष सम्मान नहीं मांगा जा सकता।

क्या है मामला?
यह मामला तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (HR&CE) कानून, 1959 से जुड़ा है। इस मामले में दायर पहली याचिका में यह मांग की गई थी कि मंदिर की परंपराओं में सरकारी दखल ना दिया जाए। याचिका पर एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए था कि परंपरा के मुताबिक सिर्फ पांच मान्यता प्राप्त मठों, कांची कामकोटि पीठम, श्री अहोबिल मठ, श्री वनमामलाई मठ, श्री परकाल जीयर मठ और श्री व्यासराय मठ को ही मंदिर में विशेष सम्मान दिया जाता रहा है। इससे आगे किसी को सम्मान देना विवाद का कारण बन सकता है।

इसके बाद श्रीरंगम श्रीमठ अंडवन आश्रमम ने अपील दायर कर कहा कि 1991 के बाद कई बार उसके मठ प्रमुख को भी सम्मान दिया गया, लेकिन बाद में बिना सुनवाई के यह परंपरा बंद कर दी गई। आश्रम की ओर से दलील दी गई कि उन्हें पहले मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया, जिससे वे अपनी बात नहीं रख सके। वहीं HR&CE डिपार्टमेंट ने कोर्ट को बताया कि तय परंपरा के अनुसार सिर्फ उन्हीं पांच मठों को सम्मान दिया जाता है और किसी भी बदलाव के लिए कानून के तहत औपचारिक फैसला जरूरी है।

कोर्ट ने खारिज की अर्जी
दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि 1991 के बाद कुछ मौकों पर अपीलकर्ता मठ को सम्मान मिला था, लेकिन सिर्फ इससे कोई कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। बेंच ने कहा कि मंदिर में सम्मान देने का मामला HR&CE एक्ट की धारा 63(e) के तहत सक्षम अधिकारी तय करेंगे। कोर्ट ने आश्रम को थोड़ी राहत देते हुए कहा कि वह चाहें तो HR&CE कानून के तहत संबंधित प्राधिकारी के पास अपनी शिकायत रख सकते हैं।

 

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