जयपुर
राजस्थान गिग वर्कर्स के लिए परिवहन विभाग ने एग्रीगेटर पॉलिसी लागू कर दी है। परिवहन विभाग संयुक्त शासन सचिव और अतिरिक्त आयुक्त परिवहन, ओपी बुनकर ने इसको लेकर नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।
इस नोटिफिकेशन के बाद अब राज्य में कैब कंपनियां को नियमों के तहत काम करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना भरना होगा साथ ही लाइसेंस भी निरस्त होगा। कैब का किराया अब सरकार तय करेगी। किराए की 80% राशि वाहन मालिक को दी जाएगी। यदि कोई यात्रा बिना उचित कारण रद्द की जाती है, तो ड्राइवर या यात्री पर अधिकतम 100 रुपए तक पेनल्टी लगेगी।
इसी के साथ ही अब यात्रियों की सुरक्षा के लिए 24×7 सक्रिय कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर खोलना अनिवार्य होगा। एप के जरिए यात्री अपनी लाइव लोकेशन शेयर कर सकेंगे और आपात स्थिति में पैनिक अलर्ट सीधे पुलिस और कंट्रोल रूम तक पहुंचेगा।
कंपनियां को 5 साल के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। जिसके लिए 10 हजार रुपए आवेदन शुल्क और अधिकतम 5 लाख रुपए तक लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गयाय है। कंपनियां को हर साल ड्राइवरों की रिफ्रेशर ट्रेनिंग करानी होगी। इसके साथ ही एग्रीगेटर कंपनियों को प्रत्येक ड्राइवर के लिए 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराना होगा। किसी भी वाहन की आयु आठ साल से ज्यादा नहीं हो सकेगी।
सरकारी नियमों के तहत उनकी पालना नहीं करने पर कंपनी का लाइसेंस तीन महीने तक निलंबित किया जा सकेगा। एक वित्तीय वर्ष में तीन बार निलंबन या किसी गंभीर अपराध की पुष्टि होने पर लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। महिला यात्रियों को यात्रा के दौरान महिला ड्राइवर चुनने का विकल्प भी होगा। शिकायतों के निपटारे के लिए हर कंपनी को एक ग्रिवेंस ऑफिसर नियुक्त करना होगा। कंपनियों को अपनी वाहन संख्या के आधार पर 10 लाख से लेकर 50 लाख तक सुरक्षा जमा राशि भी देनी होगी। राज्य में संचालन करने वाली प्रत्येक कंपनी के लिए राजस्थान में कार्यालय खोलना और एक अधिकृत एप्लायंस अधिकारी नियुक्त करना होगा।
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