अमृतसर.
पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध सोमवार को अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने के लिए अमृतसर पहुंच गए हैं। मंत्री नंगे पांव ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए हेरिटेज स्ट्रीट से श्री अकाल तख्त साहिब तक पहुंचे और माथा टेका। तस्वीर विवाद को लेकर पांच सिंह साहिबानों द्वारा स्पष्टीकरण देने के लिए उन्हें अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में तलब किया गया था। पेशी के बाद तरुणप्रीत सिंह सोंध ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का हर आदेश उन्हें सिर-माथे स्वीकार है। उन्होंने कहा कि गुरु घर के समक्ष उनका सिर हमेशा झुका है और वे सिख मर्यादा का पूर्ण सम्मान करते हैं।
सरकार के खिलाफ सख्त फैसला ले सकते हैं पांच सिंह साहिबान
श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों से जुड़े गंभीर मामले को लेकर सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब पर 5 जनवरी को तख्तों के पांच सिंह साहिबान की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में पावन स्वरूप प्रकरण पर एक बार फिर विस्तार से विचार किया जाएगा और पंजाब सरकार की कथित दखलअंदाजी पर कड़ा रुख अपनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार सिंह साहिबान इस मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) अथवा सिख संगठनों को पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने या पंथक संगठनों की तत्काल संयुक्त बैठक बुलाने के निर्देश दे सकते हैं। एसजीपीसी पहले ही सरकार पर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाती रही है।
मंत्री सौंद की पेशी भी एजेंडे में
बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पंजाब सरकार के मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किया गया है। उन पर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी शताब्दी के अवसर पर गुरु साहिब से संबंधित आपत्तिजनक होर्डिंग्स लगाए जाने का आरोप है। सिंह साहिबान मंत्री सोंध को अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे। संतोषजनक जवाब न मिलने पर धार्मिक सजा सुनाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
सीकेडी प्रधान को भी बुलावा
इसी दिन चीफ खालसा दीवान के प्रधान डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर को भी सिंह साहिबान के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। उनसे संगठन के अमृतधारी और गैर-अमृतधारी सदस्यों की सूची सौंपने को कहा गया है। पंथक और धार्मिक हलकों में इस बैठक को लेकर खासा उत्साह है। माना जा रहा है कि आज होने वाले फैसले सरकार और पंथक संस्थाओं के संबंधों की दिशा तय कर सकते हैं।
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