शिमला
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने नगर निगम शिमला के महापौर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किए जाने के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा शहरी विकास विभाग को नोटिस जारी करने और राज्य सरकार को अंतिम अवसर देने पर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणी और नोटिस इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस सरकार ने कानून, संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर अध्यादेश लाया।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा यह स्पष्ट किया जाना कि सरकार को अब अंतिम मौका दिया जा रहा है, यह दर्शाता है कि सरकार अब तक अदालत को संतोषजनक जवाब देने में असफल रही है। इससे यह साफ होता है कि महापौर का कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय पूरी तरह मनमाना, असंवैधानिक और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि याचिका में यह तथ्य सामने आया है कि सरकार द्वारा लाया गया अध्यादेश हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 36 के खिलाफ है। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार ने न केवल इसे लागू किया, बल्कि इसे राज्यपाल के पास भेजा, जहां से भी इसे स्वीकृति नहीं मिली। यह कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक और संवैधानिक विफलता को उजागर करता है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि रोस्टर के अनुसार नगर निगम शिमला के महापौर का पद महिला के लिए आरक्षित था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश लाकर महिला आरक्षण का खुला उल्लंघन किया। महिला सशक्तिकरण की बातें करने वाली कांग्रेस सरकार ने एक महिला को महापौर बनने का अवसर जानबूझकर छीना, जो बेहद शर्मनाक है। संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि अब जबकि मामला न्यायालय में गंभीर रूप ले चुका है और सरकार को नोटिस जारी हो चुके हैं, शिमला नगर निगम के वर्तमान महापौर को नैतिकता के आधार पर तुरंत अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए, ताकि लोकतंत्र और महिला आरक्षण की गरिमा बनी रहे और एक महिला को नेतृत्व का अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं के अधिकारों और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ी है। यदि कांग्रेस सरकार ने अब भी अपनी गलती नहीं मानी और रोस्टर व्यवस्था का सम्मान नहीं किया, तो भाजपा इस मुद्दे को जनहित का विषय बनाकर शिमला से लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी।
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