KGMU धर्मांतरण केस में आतंकी कनेक्शन का शक, PFI लिंक और दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े मिले नए सबूत

उत्तर प्रदेश राज्य

लखनऊ 
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े लव जिहाद, यौन शोषण और धर्मांतरण मामले की जांच गंभीर हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर केस की कमान स्पेशल टास्क फोर्स को सौंप दी गई है. STF की जांच शुरू होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बनी आंतरिक जांच समिति को भंग कर दिया गया है. 

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अब तक की जांच रिपोर्ट कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को सौंपते हुए आगे की जांच STF से कराने की सिफारिश की थी. KGMU की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी. उन्होंने 9 जनवरी को महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के दौरे के दौरान हुए बवाल से मुख्यमंत्री को अवगत कराया.

इसके साथ ही विश्वविद्यालय में की गई कार्रवाई और जांच की स्थिति भी बताई. मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. इस केस का सबसे अहम किरदार आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज पुलिस की गिरफ्त में है. 50 हजार के इनामी रमीज को 18 दिन की फरारी के बाद लखनऊ से गिरफ्तार किया गया. उससे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.

पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि KGMU में चल रहा धर्मांतरण नेटवर्क सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कई लोगों से जुड़े हो सकते हैं. यहां की दो महिला स्टाफ और एक डॉक्टर नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं. आरोप है कि मिलकर धर्मांतरण का रैकेट चलाया जा रहा था. यह भी सामने आया है कि कुछ महिलाओं ने पहले ही इसकी शिकायत की थी.

उस वक्त विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया था. अब कुछ विभागाध्यक्षों की भूमिका भी एजेंसियों के रडार पर है. रमीज की गिरफ्तारी के बाद उसके PFI कनेक्शन ने जांच को नई दिशा दी है. पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि फरारी के दौरान रमीज प्रतिबंधित संगठन PFI के कई पदाधिकारियों के संपर्क में था. उसने PFI से कानूनी मदद लेने की कोशिश भी की थी.

इसके सबूत मोबाइल डेटा से मिले हैं. रमीज के पिता सलीमुद्दीन के भी PFI से पुराने और गहरे संबंध बताए जा रहे हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि PFI ने सलीमुद्दीन को दो बार सम्मानित किया था. सबसे चौंकाने वाला खुलासा दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन को लेकर हुआ है. पूछताछ में रमीज ने स्वीकार किया है कि उसका संपर्क दिल्ली ब्लास्ट केस की आरोपी डॉक्टर शाहीन से था. 

शाहीन को पहले ही दिल्ली ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है. रमीज ने बताया कि वह डॉक्टरों की कॉन्फ्रेंस में उससे मिला था. फरारी के दौरान शाहीन बाग भी गया था. पुलिस पहले ही रमीज और डॉक्टर शाहीन के संबंधों की जानकारी ATS को दे चुकी थी. इसी इनपुट के बाद ATS ने केस में सक्रियता बढ़ा दी है. रमीज के पास से बरामद फोन के डेटा को रिकवर के लिए भेजा गया है. 

जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे PFI नेटवर्क, विदेशी संपर्क और संभावित आतंकी लिंक की कई परतें खुल सकती हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या KGMU में मेडिकल पेशे की आड़ में धर्मांतरण का कोई बड़ा नेटवर्क चल रहा था. क्या दिल्ली ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से इसके तार जुड़े हैं. और इस पूरे नेटवर्क का असली सरगना कौन है?

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