ठंड बेअसर, श्रद्धा प्रबल: माघ मेला में संगम तट पर आस्था का जनसैलाब

प्रयागराज
मकर संक्रांति और माघ मेला 2026 के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। दूर-दराज के राज्यों से लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए संगम पहुंच रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है। सुबह से ही संगम तट पर 'हर-हर गंगे' और 'जय श्रीराम' के जयघोष गूंज रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। सुबह 10 बजे तक करीब 36 लाख श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम, रोशनी, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी श्रद्धालु को स्नान या दर्शन में कोई परेशानी न हो।
मकर संक्रांति के अवसर पर अटल पीठाधीश्वर राजगुरु आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विश्वतमानंद सरस्वती जी महाराज ने श्रद्धालुओं को पवित्र संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माघ मास का विशेष महत्व है और इस माह में किए गए व्रत, पूजा और अनुष्ठान पूरे वर्ष शुभ फल देते हैं।
उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर से अटल एरिना के आचार्य इस पावन अवसर पर प्रयागराज पहुंचे हैं। उन्होंने सभी देशवासियों को माघ मास की पवित्रता का आनंद लेने और शुभकामनाएं दीं। वहीं, काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने भी मकर संक्रांति के अवसर पर संगम में पवित्र डुबकी लगाई। उन्होंने कहा कि सूर्य भगवान का मकर राशि में प्रवेश एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक क्षण है, जिसका इंतजार भीष्म पितामह ने हजारों वर्षों तक किया था। उन्होंने भागीरथ के 60 हजार पूर्वजों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दिन आस्था और मोक्ष से जुड़ा हुआ है।
शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि संगम आस्था और भक्ति का सर्वोच्च केंद्र है। जो भी यहां जिस भावना से आता है, उसे उसी अनुरूप फल मिलता है। उन्होंने कहा कि यह समय सनातन धर्म के पुनरुत्थान का है और यह दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि सनातन संस्कृति आज भी जीवंत और सशक्त है। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में कहीं स्थायी शांति संभव है, तो वह सनातन मूल्यों, आदर्शों और मान्यताओं से ही आ सकती है। सनातन ही नफरत, हिंसा और युद्ध के माहौल को समाप्त कर सकता है।
इस दौरान छह वर्षीय बाल संत श्री बाहुबली महाराज ने कहा कि यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि अगर धर्म की रक्षा होगी तो देश की रक्षा अपने आप होगी। प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। माघ मेले के दौरान जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या को लेकर सुरक्षा, यातायात और अन्य तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति का स्नान सुचारू रूप से चल रहा है और अगले कुछ घंटों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। सभी घाटों पर व्यवस्थाएं योजना के अनुसार काम कर रही हैं और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है।
प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने भी कहा कि मेला क्षेत्र में सभी व्यवस्थाएं ठीक से चल रही हैं। रोशनी, सुरक्षा और स्नान से जुड़ी सुविधाएं पर्याप्त हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है। श्रद्धालुओं ने भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जमकर सराहना की। एक श्रद्धालु ने बताया कि कड़ाके की ठंड के बावजूद स्नान करने में कोई परेशानी नहीं हुई। कानपुर से आए श्रद्धालुओं ने पार्किंग और यातायात व्यवस्था को बेहतर बताया। झारखंड से आए श्रद्धालुओं ने टिकट, ठहरने और अन्य सुविधाओं के लिए सरकार का धन्यवाद किया।
उत्तर मध्य रेलवे ने भी रेल मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए वन-वे सिस्टम, अस्थायी टिकट काउंटर, अलाव, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि रेलवे की व्यवस्थाएं कुंभ मेले जैसी हैं और यात्रा पूरी तरह सुरक्षित व सुविधाजनक है।



