कांग्रेस की रैली मुंबई में नहीं जमी, पर महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी बेचैनी

राजनीती

मुंबई  
महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों और रुझानों ने राज्य में शक्ति संतुलन के नए संकेत दिए हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक बड़ी बढ़त के साथ सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है, वहीं कांग्रेस की स्थिति विरोधाभासों से भरी नजर आ रही है। कांग्रेस मुंबई जैसे बड़े महानगरों में तो संघर्ष कर रही है, लेकिन पूरे राज्य के आंकड़ों में वह ठाकरे और शरद पवार जैसे क्षेत्रीय दिग्गजों से काफी आगे निकल गई है। 29 नगर निगमों के अब तक के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 910 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 213 और कांग्रेस के खाते में 171 सीटें जाती दिख रही हैं। कांग्रेस भले ही भाजपा से काफी पीछे है, लेकिन वह राज्य की तीसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, जो ठाकरे और शरद पवार के गुटों के लिए चिंता का विषय है।

हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस के प्रभावशाली कुल आंकड़े में मुंबई (BMC) का योगदान न के बराबर है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और शिक्षा के केंद्र पुणे दोनों ही जगह कांग्रेस महज 5-5 सीटों पर बढ़त बना पाई है। पिंपरी-चिंचवाड़, वसई-विरार, उल्हासनगर, नांदेड़ वाघाला, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले और कल्याण-डोंबिवली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला है। मुख्यमंत्री शिंदे के गढ़ ठाणे में कांग्रेस सिर्फ 2 सीटों पर आगे है, जबकि नवी मुंबई में यह शून्य पर अटकी है।

जहां कांग्रेस ने मारी बाजी
भले ही भाजपा ने प्रमुख शहरों पर कब्जा किया हो, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नगर निगमों में अपना परचम लहराया है। लातूर में कांग्रेस 21 वार्डों में बढ़त के साथ सबसे आगे है। अमरावती और चंद्रपुर, दोनों जगहों पर पार्टी 13 और 12 वार्डों के साथ शीर्ष पर है। भिवंडी निजामपुर में भी कांग्रेस 12 वार्डों के साथ अन्य दलों से आगे निकल गई है। इसके अलावा, नागपुर (22 वार्ड), कोल्हापुर (23 वार्ड) और अकोला (15 वार्ड) में कांग्रेस दूसरे स्थान पर मजबूती से खड़ी है।

पवार और ठाकरे का गिरता ग्राफ
चुनाव के रुझानों ने क्षेत्रीय क्षत्रपों के लिए कड़े संदेश दिए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर की जंग में अजीत पवार अपने चाचा शरद पवार से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रहे हैं। शरद पवार के गुट का प्रभाव अब कुछ ही क्षेत्रों तक सिमटता दिख रहा है। वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना मुंबई में तो एक मजबूत दावेदार है, लेकिन राज्य के अन्य हिस्सों में उनकी स्थिति कांग्रेस और एनसीपी (अजीत गुट) से भी नीचे चली गई है।

 

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