जबलपुर में RTE के तहत गंभीर मामला सामने आया, गरीब बच्चों के भविष्य पर सवाल, ईओडब्ल्यू की जांच जारी

मध्य प्रदेश राज्य

जबलपुर
 ईओडब्ल्यू ने जबलपुर में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों में हुए एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में 6 स्कूल संचालकों और 5 नोडल अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने एक ही छात्र का कई बार दाखिला दिखाकर सरकारी फीस प्रतिपूर्ति राशि में हेरफेर किया है।

2011 से 2016 साल तक चला घोटाला
यह घोटाला साल 2011 से 2016 के बीच हुआ है। ईओडब्ल्यू को शिकायत मिली थी कि कुछ स्कूल संचालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। शिक्षा के अधिकार के तहत, प्राइवेट स्कूलों को 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबी रेखा से नीचे वाले बच्चों के लिए मुफ्त रखनी होती हैं। इसके बदले सरकार स्कूलों को फीस देती है।

6 स्कूलों का नाम खुला
जांच में पता चला कि जबलपुर के 466 प्राइवेट स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति के तौर पर 3 करोड़ 27 लाख 83 हजार रुपये दिए गए थे। लेकिन, 6 स्कूलों ने 628 छात्रों का फर्जी दाखिला दिखाकर करीब 26.50 लाख रुपये का गबन किया।

इन पर दर्ज हुआ मामला
ईओडब्ल्यू ने स्मिता चिल्ड्रन एकेडमी के संचालक मनीष असाटी और नोडल अधिकारी श्रीमती चंद्र कोष्टा, अशासकीय आदर्श ज्ञान सागर शिक्षा शाला की संचालक श्रीमती नसरीन बेगम और नोडल अधिकारी श्रीमती गुल निगार खान, गुरू पब्लिक स्कूल के मो तौफिक और नोडल अधिकारी अख्तर बेगम, अस्मानिया मिडिल स्कूल के संचालक मो शमीम और नोडल अधिकारी राजेंद्र बुधौलिया, और सेंट अब्राहम स्कूल के संचालक मोहम्मद शफीक और नोडल अधिकारी डी के मेहता के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

 

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