क्विट-लाइन पर 1 करोड़ कॉल्स: सिगरेट-बीड़ी पैकेट पर लिखा नंबर किस काम आता है, जानें

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नई दिल्ली

Tobacco Quitline Number: अगर आपने ध्यान से सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या तंबाकू और इससे बने उत्पादों के पैकेट देखा हो तो मालूम होगा कि इन सभी पैकेट्स पर एक नंबर लिखा होता है और इसके पास लिखा होता है क्विट लाइन नंबर. क्या कभी आपने सोचा है कि यह नंबर इन पैकेट्स पर क्यों लिखा होता है और क्या कभी कोई व्यक्ति इस नंबर पर कॉल भी करता है, और अगर कॉल करता भी है तो उसका क्या फायदा होता है? नहीं! तो आइए जानते हैं..

दिल्ली के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट (VPCI) के डायरेक्टर प्रोफेसर राजकुमार ने बताया कि तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर दर्ज यह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत नेशनल टोबैको क्विट हेल्पलाइन (1800-112-356) नंबर है जो तंबाकू छोड़ने में लोगों की मदद करता है. यह टोल फ्री नंबर है, जिस पर अगर कोई व्यक्ति कॉल करता है तो वह कॉल तुरंत काउंसलर्स के पास जाती है और फिर आगे का काम ये काउंसलर्स करते हैं. ये लोग तंबाकू छोड़ने का मन बना चुके लोगों की लगातार काउंसलिंग करते हैं और 9 महीने तक फॉलोअप करते हैं.

वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट डे के मौके पर प्रोफेसर राजकुमार ने बताया कि अस्पताल की इस हेल्पलाइन पर अभी तक 1 करोड़ लोग फोन कर चुके हैं. इनमें से 6 लाख लोग ऐसे थे, जिन्हें तंबाकू छोड़ने के लिए काउंसलिंग दी गई और इनमें से करीब 35 फीसदी लोग तंबाकू छोड़ पाए. तंबाकू छोड़ने वाले लोगों में बीड़ी-सिगरेट या बिना धुएं वाला तंबाकू छोड़ने वाले सभी लोग शामिल हैं.

वे कहते हैं कि यह देश की सबसे प्रभावी तंबाकू क्विट हेल्पलाइन है लेकिन लोगों को इसके बारे में नहीं पता. सबसे बड़ी बात है कि यह हर उस उत्पाद पर मौजूद है जिसमें तंबाकू है. शुरुआत में यह सेवा VPCI से शुरू की गई थी, लेकिन इसकी सफलता के बाद इसके तीन आउटरीच सेंटर बेंगलुरु के निमहांस, मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट और गुवाहाटी के रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट में खोले गए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को और कई भाषाओं में मदद मिल सके.

कब से कब तक काम करता है यह क्विट लाइन नंबर

यह हेल्पलाइन नंबर सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक काम करता है. सोमवार को यह बंद रहता है. फिलहाल यह 15 भारतीय भाषाओं में काउंसलिंग की सुविधा देती है.इसकी पहचान बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि हेल्पलाइन नंबर सभी तंबाकू उत्पादों पर छापा जाए. ऐसे में जब भी कोई व्यक्ति तंबाकू का पैकेट उठाता है और छोड़ने के बारे में सोचता है, तो मदद का नंबर उसे वहीं मिल जाता है.

कब शुरू हुई क्विटलाइन
प्रोफेसर कुमार ने बताया कि यह क्विटलाइन 2016 में शुरू की गई थी. इसमें सिर्फ फोन पर काउंसलिंग ही नहीं दी जाती बल्कि बल्कि यह व्यक्ति के तंबाकू छोड़ने के पूरे सफर में उसके साथ रहती है और लगातार 7 दिन, 1 महीना, 3 महीने और 9 महीने तक फॉलोअप करती है और यही चीज इसे सफल बनाती है.

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