रेफरी के फैसलों ने बढ़ाया विवाद, मेसी इवेंट से पहले अनुशासन समिति के सामने पेश होंगे अधिकारी

खेल

कोलकाता
कोलकाता में अर्जेंटीना के फुटबॉल सुपरस्टार लियोनेल मेसी के इवेंट से पहले खेले गए एक फुटबॉल मैच को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 13 दिसंबर को साल्ट लेक स्टेडियम (युवा भारती क्रीड़ांगन) में हुए इस मैच में रेफरी का काम करने वाले चार रेफरी अब जांच के दायरे में आ गए हैं। फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन (आईएफए) ने इन चारों रेफरी को अपनी आंतरिक अनुशासन कमिटी के सामने पेश होने के लिए बुलाया है।

इन रेफरी पर आरोप है कि उन्होंने इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन या कलकत्ता रेफरी एसोसिएशन से पूर्व अनुमति लिए बिना इस हाई-प्रोफाइल मैच में अंपायरिंग की। सूत्रों के मुताबिक, नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया गया है और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन की अनुशासन कमिटी की बैठक 20 जनवरी को होने वाली है, जहां रेफरी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।

यह मामला उस बड़े विवाद से जुड़ा है जो लियोनेल मेसी के कोलकाता दौरे के दौरान सामने आया था। मेसी के आगमन से पहले ही स्टेडियम खचाखच भर गया था और हजारों प्रशंसक अपने पसंदीदा फुटबॉलर की एक झलक पाने के लिए बेसब्र थे। हालांकि, मेसी के स्टेडियम में पहुंचते ही स्थिति बेकाबू हो गई। भीड़ फोटो लेने के लिए आगे बढ़ी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई। मेसी केवल 22 मिनट तक मैदान पर मौजूद रहे और इसके बाद स्टेडियम छोड़कर चले गए।

उनके जाने के बाद हालात और बिगड़ गए। दर्शकों ने गुस्से में स्टेडियम के अंदर तोड़-फोड़ की। कुर्सियां और बोतलें मैदान में फेंकी गईं, गेट तोड़ दिए गए, और कई लोग पिच पर घुस गए। स्टेडियम की गैलरी और रेस्ट रूम में भी नुकसान की खबरें सामने आईं। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने जांच कमेटी का गठन किया।

इवेंट के आयोजक सतद्रु दत्ता को गिरफ्तार कर लिया गया और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इसके अलावा, अरूप ने राज्य के खेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार समेत कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

मेसी के इवेंट से पहले खेले गए मोहन बागान और डायमंड हार्बर लेजेंड्स के बीच मैच में अंपायरिंग करने वाले ये चार रेफरी अब नियमों के उल्लंघन के आरोपों का सामना कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन की जांच यह तय करेगी कि उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।

 

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