इस्लामाबाद
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) के दिल्ली दौरे के बाद पाकिस्तान में हलचल तेज हो गई है। भारत–यूएई के संयुक्त बयान में सीमा-पार आतंकवाद की आलोचना को इस्लामाबाद के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। पाकिस्तान में इस पर व्यापक चर्चा हो रही है। MBZ का यह संक्षिप्त, लगभग तीन घंटे का दिल्ली दौरा रणनीतिक रूप से अहम बताया जा रहा है। इसी दौरान भारत और यूएई ने रक्षा सहयोग, डिफेंस टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के संकेत दिए।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इसी पृष्ठभूमि में, यूएई राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के तुरंत बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान को फोन किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बातचीत की पुष्टि करते हुए ‘ताजा घटनाक्रम और आपसी हितों’ पर चर्चा की बात कही, हालांकि विवरण साझा नहीं किया। भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत–यूएई की बढ़ती नजदीकी पाकिस्तान को असहज कर रही है।
अमेरिका स्थित विश्लेषक डेरेक जे. ग्रॉसमैन के मुताबिक, इस फोन कॉल को भारत–यूएई रिश्तों से उपजी पाकिस्तान की चिंता के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। विशेषज्ञ यह भी इंगित करते हैं कि क्षेत्र में सऊदी अरब और यूएई के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव के बीच यूएई भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है, जहां भारत एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरता दिख रहा है। इसी कारण दिल्ली–आबूधाबी रक्षा सहयोग को पाकिस्तान अपनी रणनीति के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है।
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