नईदिल्ली /तेहरान
नोबेल पीस प्राइज का सपना लेकर घूमने वाले ट्रंप ने दुनिया भर में जंग मचा दी है. ट्रंप ने पावरफुल भारत के साथ कई देशों से रिश्ते खराब करने की भी पुरजोर कोशिश की है. पहले रूस और फिर ईरान के साथ ट्रेड बंद करवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैरिफ का हथौड़ा मारा था लेकिन उनका सारा प्लान चौपट हो गया. रूस और भारत के रिश्ते तो हर हाल में मजबूत रहते हैं लेकिन अब ईरान ने भी साफ कर दिया है कि इंडिया के साथ उसके रिश्ते कितने तगड़े हैं.
खामेनेई के करीबी ने India Iran के रिश्तों पर कही ऐसी बात
दुनिया को लग रहा था कि अमेरिका के दबाव में भारत और ईरान के रास्ते अलग हो जाएंगे. इन कयासों के बीच तेहरान से आए एक बयान ने सबको चौंका दिया है. ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्य सलार विलायतमदार ने रूस के सरकारी मीडिया RT को दिए इंटरव्यू में बड़ी बात कह दी है. उन्होंने सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ‘दुश्मनों और विरोधियों’ की उकसाने वाली कार्रवाइयों का भारत-ईरान के रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
अमेरिका को दिया तगड़ा जवाब
उन्होंने भारत को एक समझदार और तर्कसंगत देश बताते हुए कहा कि ‘नई दिल्ली जानती है कि कौन अपने फायदे के लिए इस दोस्ती में दरार डालना चाहता है’. भारत की सबसे बड़ी चिंता चाबहार बंदरगाह है, जो दिल्ली के लिए मिडिल ईस्ट में तीसरी आंख है. 26 अप्रैल 2026 को अमेरिका द्वारा दी गई ‘प्रतिबंधों से छूट’ खत्म हो रही है और ट्रंप ने धमकी दी है कि जो देश ईरान के साथ बिजनेस करेंगे, उन पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा. भारत के लिए यह पोर्ट रूस और सेंट्रल एशिया तक पहुंचने का इकलौता रास्ता है, जिसे वह चाहकर भी नहीं छोड़ सकता.
दूर कर दी चाबहार वाली चिंता
ये चिंता दूर करते हुए विलायतमदार ने साफ कर दिया कि चाबहार डील 2015 में फाइनल हुई थी और यह दोनों देशों के हितों के लिए है. उन्होंने चाबहार डील को सुरक्षित रखते हुए कह दिया है कि ‘भारत-ईरान के ये रिश्ते सतही राजनीतिक चालों से कहीं ज्यादा गहरे हैं’.
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