विश्व धरोहर में पर्यावरण संरक्षण पर बड़ा कदम, महाबोधि मंदिर परिसर में प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध

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बोधगया/गयाजी.

विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर परिसर को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा और सख्त निर्णय लिया गया है। गुरुवार से मंदिर परिसर में प्लास्टिक के पैकेट, बोतल और कंटेनर के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। यह कदम पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मंदिर परिसर की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अब तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पूजा सामग्री, जल, प्रसाद और अन्य जरूरी सामान प्लास्टिक के पैकेट या कंटेनर में लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश करते थे। पूजा के बाद इन्हें परिसर में ही फेंक दिया जाता था, जिससे यहां गंदगी और प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ रही थी। कई बार सफाई के बावजूद परिसर में प्लास्टिक कचरे का ढेर लग जाता था, जो विश्व धरोहर की गरिमा के अनुकूल नहीं था। इसी स्थिति को देखते हुए बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (बीटीएमसी) ने प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

मंदिर के सभी इंट्री प्वाइंट पर सूचना बोर्ड लगाए गए हैं, जिन पर चार भाषाओं में प्लास्टिक प्रतिबंध से संबंधित स्पष्ट जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पहले से नियमों की जानकारी देना है, ताकि वे बिना प्लास्टिक सामग्री के ही मंदिर परिसर में प्रवेश करें। बीटीएमसी की सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे पूजा सामग्री कपड़े या कागज के थैले में लेकर आएं। उन्होंने कहा कि महाबोधि मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह विश्व धरोहर भी है। इसकी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करना सभी का नैतिक दायित्व है। प्लास्टिक मुक्त परिसर से मंदिर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने में मदद मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि पहले बीटीएमसी के स्टाफ और मंदिर सुरक्षा में तैनात कर्मियों द्वारा कई बार प्लास्टिक का उपयोग न करने की हिदायत दी गई थी, लेकिन इसका पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा था। अब इस नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन और सुरक्षा कर्मी प्रवेश द्वार पर ही प्लास्टिक सामग्री की जांच कर रहे हैं। जो भी श्रद्धालु या पर्यटक प्लास्टिक के साथ मंदिर पहुंच रहे हैं, उन्हें प्रवेश से पहले ही रोक दिया जा रहा है और बिना प्लास्टिक सामग्री के आने का निर्देश दिया जा रहा है।

प्रशासन का मानना है कि इस सख्ती से कुछ समय में श्रद्धालुओं में जागरूकता बढ़ेगी और महाबोधि मंदिर परिसर पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बन सकेगा।

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