गाजा पर बयानबाज़ी, अमेरिका के आगे मजबूरी; ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में मुस्लिम देशों की एंट्री

दुनिया

वाशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा के लिए चर्चित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई मुस्लिम देश शामिल हो गए हैं। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने हाल ही में संयुक्त बयान जारी कर गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को लेकर अपना समर्थन दोहराया है। हालांकि मुस्लिम देशों का यह फैसला विवादों के घेरे में आ गया है जहां यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि फिलिस्तीन की स्वायत्तता को लेकर चिंता जाहिर करने वाले देश अब किसी दूसरे प्रशासन को गाजा की जिम्मेदारी सौंपे जाने का समर्थन कैसे कर सकते हैं।
 
इससे पहले बुधवार को कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई ने एक संयुक्त बयान जारी कर बोर्ड ऑफ पीस का समर्थन किया। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से अपने नेताओं को भेजे गए निमंत्रण का स्वागत करते हैं और सामूहिक रूप से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का फैसला कर रहे हैं। बयान में यह भी कहा गया है कि सभी देश अपने-अपने कानूनी और जरूरी प्रक्रियाओं के तहत बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे।

क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
गौरतलब है कि ट्रंप का यह शांति बोर्ड गाजा में एक ट्रांजिशनल एडमिनिस्ट्रेशन के रूप में काम करेगा। अमेरिका का कहना है कि इसका मकसद स्थायी सीजफायर को मजबूत करना, गाजा के पुनर्निर्माण में मदद करना और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ना है, ताकि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता कायम हो सके। यह बोर्ड गाजा के लिए फंड जुटाने का काम भी करेगा।

मुस्लिम देशों के फैसले पर सवाल
कई जानकार इसे मुस्लिम देशों का ट्रंप के आगे सरेंडर बता रहे हैं। पाकिस्तानी सीनेट के विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर हुसैन ने इस बोर्ड को गलत बताते हुए कहा है कि इसे जंग के बाद गाजा को बाहरी लोगों द्वारा चलने के लिए बनाया गया था, जो असल में फिलीस्तीन के लोगों से उनका खुद का राज चलाने का अधिकार छीन लेता है और यह नए जमाने की गुलामी जैसा लगता है।

भारत ने अभी तक नहीं लिया कोई फैसला
इस बीच भारत ने अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए दिए गए आमंत्रण पर कोई फैसला नहीं लिया है। मामले से परिचित लोगों ने बुधवार को यह जानकारी दी है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बोर्ड में शामिल होने के लिए कई वैश्विक नेताओं को आमंत्रित किया था। इस सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी शामिल हैं। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि भारत इस पहल के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है क्योंकि इसमें संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।

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