वाशिंगटन
अमेरिका के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से हटने के फैसले पर WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा बताए गए कारण तथ्यों से परे और गलत हैं। डॉ. टेड्रोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका WHO का संस्थापक सदस्य रहा है और संगठन की कई ऐतिहासिक उपलब्धियों में उसकी अहम भूमिका रही है। इनमें चेचक का उन्मूलन, पोलियो, HIV, इबोला, इन्फ्लुएंजा, टीबी, मलेरिया और अन्य गंभीर बीमारियों के खिलाफ लड़ाई शामिल है।
अमेरिका के फैसले पर WHO की आपत्ति
WHO प्रमुख ने कहा, “अमेरिका के WHO से हटने से न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया कम सुरक्षित हो जाती है।” उन्होंने साफ किया कि WHO हमेशा सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करता आया है और अमेरिका के साथ भी यही रवैया रहा है। WHO को उम्मीद है कि भविष्य में अमेरिका फिर से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाएगा।
COVID-19 पर लगाए गए आरोप
अमेरिका ने WHO पर COVID-19 महामारी के दौरान विफलता, जानकारी छिपाने और गलत मार्गदर्शन देने का आरोप लगाया था। इस पर WHO ने कहा कि WHO ने महामारी के दौरान तेज़ी और पारदर्शिता से जानकारी साझा की। मास्क, वैक्सीन और सामाजिक दूरी की सलाह दी गई लेकिन लॉकडाउन या वैक्सीन अनिवार्यता की सिफारिश कभी नहीं की अंतिम फैसले सरकारों पर छोड़े गए। WHO ने माना कि किसी भी संगठन से कुछ गलतियां हो सकती हैं, लेकिन उसने महामारी से निपटने में अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाई।
अमेरिका का आधिकारिक रुख
22 जनवरी को अमेरिका ने औपचारिक रूप से WHO से बाहर निकलने की घोषणा की।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य मंत्री केनेडी ने कहा कि आगे WHO से अमेरिका का संपर्क सिर्फ निकासी प्रक्रिया और अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा तक सीमित रहेगा। WHO ने दोहराया कि वह सभी देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा और उसका लक्ष्य है हर इंसान को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना, जो एक मौलिक मानव अधिकार है।
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