उदयपुर.
लेक सिटी उदयपुर और क्रिकेट जगत के लिए एक दुखद खबर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले दिग्गज अंपायर और प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफेसर रघुवीर सिंह राठौड़ (88) का निधन हो गया। वे पिछले 15 दिनों से अस्वस्थ थे और उदयपुर के एक अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था, जहां शाम करीब चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
बता दें कि प्रोफेसर राठौड़ का व्यक्तित्व बहुआयामी था। जहां एक ओर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की पिच पर सख्त अंपायरिंग की, वहीं दूसरी ओर मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (MLSU) में भूगोल के प्रोफेसर के रूप में हजारों छात्रों का भविष्य संवारा। उनके शिष्यों की सूची में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, पूर्व सांसद नमोनारायण मीणा और पूर्व आईएएस धर्मसिंह सागर जैसी दिग्गज हस्तियां शामिल हैं।
अंपायरिंग करियर की प्रमुख उपलब्धियां
प्रो. राठौड़ सेंट्रल जोन (राजस्थान, यूपी, एमपी, विदर्भ और रेलवे) से निकलने वाले अग्रणी अंतरराष्ट्रीय अंपायरों में से एक थे। करियर के मुख्य पड़ाव में अपना पहला टेस्ट मैच 1992 में चंडीगढ़ में भारत बनाम श्रीलंका के बीच कराया। साल 1993 में चेन्नई में भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट मैच में भी उन्होंने अंपायर की कमान संभाली। उन्होंने कुल सात अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैचों में अंपायरिंग की, जिसमें पहला मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच था।
तीन दशक तक संभाली उदयपुर क्रिकेट की कमान
उनके घनिष्ठ मित्र और पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर बलवंत शर्मा ने बताया कि प्रो. राठौड़ का क्रिकेट प्रशासन में भी अतुलनीय योगदान रहा। वे 1966 से 1996 तक लगातार 30 वर्षों तक उदयपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव रहे। इसके बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी बलवंत शर्मा को सौंपी थी।
खेल जगत में शोक की लहर
उनके निधन की खबर मिलते ही वंडर क्रिकेट एकेडमी परिसर में एक शोक सभा आयोजित की गई। जिला क्रिकेट संघ के सचिव मनोज चौधरी, कोच और खिलाड़ियों ने मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उदयपुर के खेल प्रेमियों का कहना है कि प्रो. राठौड़ के निधन से एक युग का अंत हो गया है, जिन्होंने शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों को समान रूप से समृद्ध किया।
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