चंडीगढ़.
केंद्रीय बजट 2026 में हरियाणा के लिए सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ कृषि क्षेत्र को लेकर सामने आया है। लंबे समय से राज्य के हजारों किसानों की समस्या बनी जलभराव और खारी जमीन को लेकर केंद्र ने पहली बार स्पष्ट और लक्षित हस्तक्षेप का संकेत दिया है। बजट में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विशेष प्रावधानों के साथ तकनीकी और वित्तीय सहयोग का रास्ता खोला गया है, जिससे हरियाणा की करीब 6 लाख एकड़ प्रभावित भूमि को दोबारा खेती योग्य बनाने की दिशा तय मानी जा रही है।
हरियाणा की भौगोलिक स्थिति और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को देखते हुए केंद्र सरकार ने बजट में राज्य की उस समस्या को प्राथमिकता दी है, जो दशकों से उत्पादन और आय दोनों को प्रभावित कर रही थी। झज्जर, रोहतक, सोनीपत, हिसार, फतेहाबाद, जींद और सिरसा जैसे जिलों में जलस्तर ऊपर आने और लवणता बढ़ने से फसलें लगातार कमजोर होती गईं। बजट 2026 में इस चुनौती से निपटने के लिए वर्टिकल ड्रेनेज और सब-सरफेस ड्रेनेज जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
बजट के बाद हरियाणा में जलभराव से प्रभावित भूमि के सुधार के लिए अगले 3 से 5 वर्षों का लक्ष्य तय किया गया है। इसके तहत खेतों में जमीन के नीचे पाइपों का जाल बिछाकर अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर निकाला जाएगा। इस तकनीक से पहले जिन खेतों में फसल उगाना मुश्किल था, वहां दोबारा खेती संभव हो सकेगी। केंद्र और राज्य की साझा रणनीति के तहत लागत का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी। हरियाणा में करीब 12 लाख एकड़ कृषि क्षेत्र ऐसा है, जहां भूजल स्तर खतरनाक रूप से ऊपर पहुंच चुका है। इनमें से लगभग 6 लाख एकड़ भूमि गंभीर जलभराव और लवणता से प्रभावित है।
झज्जर, रोहतक, सोनीपत, हिसार, फतेहाबाद, जींद और सिरसा जिले इस समस्या से सबसे अधिक जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन इलाकों में फसल उत्पादन 30 से 70 प्रतिशत तक घट चुका है। बजट के बाद ड्रेनेज सिस्टम, माइक्रो-इरिगेशन और जल संग्रहण योजनाओं को एकीकृत रूप से लागू किया जाएगा। हरियाणा सरकार ने लंबे समय से जलभराव और खारी जमीन की समस्या को प्रदेश के लिए गंभीर कृषि संकट बताते हुए केंद्र के समक्ष रखा था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं यह मांग केंद्र सरकार से की गई थी कि सेम से प्रभावित क्षेत्रों को प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति मानकर विशेष सहायता दी जाए। बजट 2026 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किए गए प्रावधानों को इसी मांग की स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे राज्य की रणनीति को केंद्र का समर्थन मिला है।
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