हड़प्पा सभ्यता के खुल रहे रहस्य, राखीगढ़ी में खुदाई में मिले मिट्टी के डायनिंग टेबल-चूल्हे

राज्य

हिसार.

ऐतिहासिक नगरी राखीगढ़ी में एक बार फिर खोदाई में हजारों साल पुराने अवशेष सामने आ रहे हैं। टीले दो पर चूल्हा, खाना खाने की टेबल और मृदभांड के टुकड़े मिले हैं। इससे यह साबित होता है कि हजारों साल पहले भी हमारे बुजुर्ग खाना खाने के लिए मिट्टी की डायनिंग टेबल का प्रयोग करते थे।

हजारों वर्ष पहले ही उन्होंने सुविधाओं से लैस ऐसी वस्तुओं की खोज कर ली थी जिनका प्रयोग आज हम कर रहे हैं। खोदाई में निकल रहे अवशेष ऐसे गवाह के रूप में सामने आ रहे हैं। जो कि हजारों साल पहले दफन हो गए थे। ये अपनी कहानी खुद बयां कर रहे हैं। ये सभ्यता क्यों खत्म हुई थी इस बात का जवाब आज भी इन्हीं टीलों के नीचे दबा है। राखीगढ़ी में हो रही तीन टीलों की खोदाई से यह तस्वीर साफ होगी कि उस समय इस मेगा सिटी शहर का क्या स्वरूप था। टीले दो पर लगातार खोदाई से हर रोज इतिहास की परतें खुल रही हैं।

खोदाई के दौरान चूल्हा, बर्तनों के टुकड़े, खाने की मेज (डीस आन स्टैंड) सहित काफी मात्रा में पाटरी (टुकड़े) मिली है। इनको साफ करके कार्बन डेटिंग के लिए भेजा जाएगा। टीले के बाहरी किनारे पर खोदाई में ये अवशेष मिलने से पुरातत्वविद यह अनुमान लगा रहे हैं कि वो किनारों पर भी बसासत करके रहते थे। कच्ची ईंटों की दीवार और चूल्हा इस बात के गवाह हैं। वो लोग यहां सुरक्षा के लिए रहते थे या किसी और कारण से इस अतीत को जानने के लिए अभी इंतजार करना होगा। हालांकि, जिस मकसद से खोदाई की जा रही है। शुरुआत में ही ऐसी चीजें मिलने से शहर का स्वरूप जल्द ही सामने आ जाएगा।

टीला नंबर- तीन पर भी खोदाई जारी
टीले एक पर पहले जो ट्रेंच लगाया था। वहां पर करीब एक फीट गहराई तक खोदाई हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई ठोस अवशेष नहीं मिला। सिर्फ पाटरी ही मिली है। उससे कुछ ही दूरी पर एक ट्रेंच और बनाया गया है। उस पर जल्द ही खोदाई शुरू होगी। टीला नंबर- तीन पर भी खोदाई की जा रही हैं। ताकि टीलों के बाहरी किनारों से हड़प्पाकालीन सभ्यता का राज खुल सके।

 

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