विश्व बैंक रिपोर्ट: महायुद्ध के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था बनी ‘ग्लोबल स्टार’, पाकिस्तान संकट में

देश

नई दिल्ली

एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड महामारी के बाद भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं ने बिल्कुल अलग दिशा पकड़ी है। जहां पाकिस्तान कई वर्षों से आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, वहीं भारत तेजी से बढ़ते हुए विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 6% की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन यह वृद्धि लंबे समय तक टिक नहीं पाई। 2023 में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगभग ठहर सी गई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने केवल 0.5% विकास का अनुमान लगाया। इसके विपरीत भारत की अर्थव्यवस्था 2023 में 6% से अधिक बढ़ी और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की “उजली किरण” माना गया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान की समस्याओं को उसके ही देश के अंदरूनी स्तर पर भी स्वीकार किया जा रहा है। इस्लामाबाद में हुए एक बिजनेस कार्यक्रम में विशेष निवेश सुविधा परिषद (SIFC) के राष्ट्रीय समन्वयक लेफ्टिनेंट-जनरल सरफराज अहमद ने कहा था कि पाकिस्तान के पास “कोई विकास योजना नहीं है” और देश की वित्तीय स्थिति बुरी तरह बिगड़ी हुई है। पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या महंगाई रही है। 2022 से 2023 के बीच महंगाई दर 37.97% तक पहुंच गई, जो पिछले 30 वर्षों में सबसे ज्यादा मानी जा रही है। इससे आम लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें बढ़ गईं। विश्व बैंक के अनुसार महंगाई के कारण लगभग 13 मिलियन पाकिस्तानियों को गरीबी में गिरना पड़ा। 

2023-24 तक गरीबी दर बढ़कर 25.3% हो गई, यानी लगभग हर चार में से एक व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय गरीबी मानक (दैनिक 4 डॉलर से कम) लागू किया जाए तो पाकिस्तान की लगभग 45% आबादी गरीब मानी जा सकती है।भारत में भी इस अवधि में महंगाई रही, लेकिन यह पाकिस्तान की तुलना में काफी कम थी। भारत में 2023 में मुद्रास्फीति 5-6% के आसपास थी और 2024 में यह और कम हुई। 2023 के अंत में भारत में खुदरा महंगाई 5% से नीचे आ गई, खासकर खाद्य कीमतों के नियंत्रण के कारण। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक औसत पाकिस्तानी उपभोक्ता को भारत के मुकाबले लगभग पांच गुना अधिक महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। गरीबी के मामले में भी भारत ने बड़ी प्रगति की है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत में दैनिक 4 डॉलर से कम पर जीने वाले लोगों की संख्या 2023 तक 16% से घटकर 2.3% रह गई है।

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