भोपाल
मध्य प्रदेश में बड़े शहरों व कस्बों के बाद अब राज्य सरकार ग्राम पंचायत स्तर तक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों का विस्तार करेगी। एमएसएमई विभाग इसकी विस्तृत कार्ययोजना बना रहा है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के माध्यम से ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और ग्राम स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराना है।
इसके लिए पहले जिलों का पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयन कर प्रयोग किया जाएगा। ऐसी ग्राम पंचायतें चिह्नित की जाएंगी जहां सड़क, बिजली, पानी और उद्योग के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। रियायती दरों पर निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
भोपाल से लगी ग्राम पंचायतों को किया जा रहा चिह्नित
बता दें, इंदौर के आसपास की ग्राम पंचायतों में पहले से 308 उद्योग स्थापित हैं। यहां 90.41 करोड़ रुपये पूंजीगत निवेश हुआ है और इससे 1954 लोग रोजगार पा रहे हैं। भोपाल से लगी ग्राम पंचायतों को भी चिह्नित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इनमें क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास के लिए योजनाबद्ध हस्तक्षेप आवश्यक है।
जिससे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के बीच न्यायसंगत अवसर सुनिश्चित किया जा सके। इसमें छोटे उद्यमों के लिए वित्तीय क्रेडिट को सरल बनाया जाएगा। नए उद्यमों के लिए बाजार में प्रवेश की बाधाओं का सरलीकरण किया जाएगा।
एमएसएमई ऋण मूल्यांकन -कैश फ्लो आधारित जोखिम मूल्यांकन को अपनाना, वित्तीय माड्यूल को प्रशिक्षण में एकीकृत करना, सूचना विषमता को दूर करना और श्रमिक अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
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