CJI सूर्यकांत ने कहा: “चुनाव आते ही परेशानी होती है…” हिमंत सरमा पर याचिका पर टिप्पणी

देश

नई दिल्ली

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के भाषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इसपर भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि कई बार राजनीतिक जंग सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जाती है। उन्होंने इस याचिका पर विचार करने की बात कही है। विपक्ष ने सरमा के अल्पसंख्यकों पर निशाना लगाते वीडियो और भाषण पर आपत्ति जताई थी। शीर्ष न्यायालय याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।

शीर्ष न्यायालय में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच सुनवाई कर रही थी। सीजेआई ने कहा, 'परेशानी यह है कि जब चुनाव आते हैं, जो कई बार उन्हें यहां सुप्रीम कोर्ट में लड़ा जाता है। हम इसे देखेंगे।'

अदालत में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया नेता एनी राजा की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी। उन्होंने सीएम सरमा के 27 जनवरी को दिए भाषण पर आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत पहुंचे एडवोकेट निजाम पाशा ने कहा, 'मीलॉर्ड राजनीतिक दल के सदस्य की तरफ से हेट स्पीच के खिलाफ एक याचिका दाखिल हुई है। एक वीडियो भी है, जिसमें मुख्यमंत्री अल्पसंख्यकों पर निशाना लगाते नजर आ रहे हैं।'

पीठ ने वकील निजाम पाशा की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वह याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगी। पाशा वाम दलों के कुछ नेताओं की ओर से पेश हुए थे। उन्होंने पीठ के समक्ष कहा, 'हम इस अदालत से असम के मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए चिंताजनक बयानों और हाल में पोस्ट किए एक वीडियो को लेकर तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हैं। इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।'

जमीयत भी पहुंची थी सुप्रीम कोर्ट

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सरमा के भाषण के खिलाफ 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा कि विशेष रूप से उच्च संवैधानिक पद पर आसीन किसी व्यक्ति की तरफ से दिए गए इस तरह के बयानों को राजनीतिक बयानबाजी या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

भाषण में क्या था

सरमा ने 27 जनवरी को डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ‘मिया’ समुदाय के लोगों को राज्य में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से ‘मिया’ मतदाताओं के नाम हटाना केवल एक प्रारंभिक कदम है, और जब बाद में राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया जाएगा, तो बांग्लादेश के मुसलमानों के चार से पांच लाख वोट रद्द कर दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा था, 'हां, हम मिया समुदाय के वोट चुराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें हमारे देश में नहीं, बल्कि बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। हम यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था कर रहे हैं कि वे असम में वोट न दे सकें।' उन्होंने कहा था, 'अगर मिया समुदाय को इस संबंध में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो हमें क्यों चिंतित होना चाहिए?'

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