EPF को लेकर योगी सरकार का बड़ा कदम, विधान परिषद में छाया आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का मामला

उत्तर प्रदेश राज्य

लखनऊ

उत्तर प्रदेश विधान परिषद में मंगलवार को भारतीय जनता पाटर्ी (भाजपा) के एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने नियम 115 के अंतर्गत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से की जा रही ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) कटौती की राशि कर्मचारियों के खातों में अनिवार्य रूप से जमा कराए जाने की मांग उठाई। उन्होंने इस विषय को लोक महत्व का बताते हुए सरकार का ध्यान आकृष्ट किया।

आउटसोर्सिंग सेवा निगम बनाए जाने का निर्णय
एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने कहा कि राज्य में आउटसोर्सिंग के आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आउटसोर्सिंग सेवा निगम बनाए जाने का निर्णय लिया गया है, जिसकी पूरे प्रदेश में सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का शोषण आम बात थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक पहल की है।

कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही थी ईपीएफ की राशि
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के कई हिस्सों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ की कटौती तो नियमित रूप से की जा रही है, लेकिन संबंधित धनराशि कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही है। इस स्थिति से कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे लगातार संबंधित विभागाध्यक्षों से शिकायत कर रहे हैं।

कर्मचारियों की मूल समस्या का अब होगा समाधान
विजय बहादुर पाठक ने सदन को अवगत कराया कि विभागीय अधिकारी अक्सर ठेकेदारों और सेवा प्रदाता कंपनियों पर जिम्मेदारी डालकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। कई स्थानों पर यह विषय आंदोलन का रूप ले चुका है और कहीं-कहीं ठेकेदार या एजेंसी बदल दी जाती है, लेकिन कर्मचारियों की मूल समस्या जस की तस बनी रहती है।

 कर्मचारियों के खाते में अब पूरी राशि समय से जमा होगी
उन्होंने बताया कि बरेली, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, वाराणसी सहित कई नगर निगमों से इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं। लखनऊ नगर निगम में तो कर्मचारियों ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी ईपीएफ राशि एजेंसी, ठेकेदार और नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से हड़पी जा रही है। एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने सरकार से मांग की कि इस गंभीर और तात्कालिक लोक महत्व के विषय पर ठोस कारर्वाई करते हुए ऐसी सुनिश्चित व्यवस्था की जाए, जिससे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से की जाने वाली ईपीएफ कटौती की पूरी राशि समय से उनके खातों में जमा हो सके।

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