उज्जैन
वंदे मातरम् वाले स्कूलों से निकाल ले बच्चे; मुसलमानों से उज्जैन ईमाम की अपील
केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में वंदे मातरम के सभी 6 छंदों का गायन अनिवार्य करने का निर्णय किया है। इसको लेकर गृह मंत्रालय ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों को खड़ा होना जरूरी होगा। इस फैसले का उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कड़ा विरोध किया है। उनकी दलील है कि वंदे मातरम् इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है क्योंकि इसमें मातृभूमि की पूजा की बात की गई है। उन्होंने मुस्लिमों से अपने बच्चों को उन स्कूलों से निकालने की अपील की है जहां वंदे मातरम् को अनिवार्य किया जा रहा है।
इस्लाम नहीं देता इजाजत
उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा कि भारत में हर धर्म और मजहब के लोग रहते हैं। हम किसी को यह नहीं कह सकते हैं कि आप किसी एक खुदा को मानें… हम यह भी किसी से नहीं कह सकते हैं कि आप कई खुदा को मानें। हिन्दुस्तान एक ऐसा चमन है जहां हर तरह के फूल को रखा गया है। यही इसकी ब्यूटी है। वंदे मातरम् में साफ लिखा गया है कि हम इस धरती की पूजा करते हैं। इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है। इस्लाम का आधार ही एकेश्वरवाद है।
हम तो पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी नहीं पूजते
मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने आगे कहा कि हम खुदा के साथ किसी को शामिल नहीं कर सकते हैं। हम ना तो हिन्दुस्तान की जमीन को पूज सकते हैं ना ही मक्का और मदीना की जमीन को पूज सकते हैं। हम पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी पूजते नहीं हैं। हम उनकी तालीम पर चलते हैं। इस्लाम एक ही ईश्वर पर आधारित है। हम इसे छोड़ नहीं सकते हैं। हम हुकूमत से यह गुजारिश करते हैं कि आगे से इस तरह का कोई प्रोग्राम ना चलाए जो किसी धर्म को चोट पहुंचाते हों।
जिन स्कूलों में वंदे मातरम् वहां से बच्चों को निकाल लें
मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार इस फैसले को वापस ले। हम अपने बच्चों को ऐसी किसी भी संस्था में नहीं भेज सकते जहां उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ होता हो। हमारे यहां हिन्दुस्तान की पूजा का कोई जिक्र नहीं है। इस्लाम तो इसकी बिल्कुल इजाजत नहीं देता है। हम कहेंगे कि जिन स्कूलों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किया जा रहा है, मुसलमान वहां से सभी अपने बच्चों को निकाल लें।
कानून नहीं मानने वालों को देश में रहने की कोई जरूरत नहीं
मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी के बयान पर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। हिन्दू संगठनों ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। संतों ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। महामंडलेश्वर अतुलेशनन्द ने कहा कि भारत में रहना है तो वंदे मातरम गाना होगा। यह भारत भूमि है और कानून सबके लिए एक है। इस कानून को जो नहीं मानता या नहीं स्वीकार करता है उसको इस देश में रहने की कोई जरूरत नहीं है। इस देश में रहने वाले कुछ लोग हमारे संविधान को मानते नहीं हैं। ऐसे लोगों के लिए बांग्लादेश या पाकिस्तान के रास्ते खोल देने चाहिए।
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