ऊर्जा विभाग कर बना रहा नए 16 ग्रिड उपकेंद्र, नई इंडस्ट्रियों को 838 मेगावाट बिजली रिजर्व

राज्य

पटना.

बिहार में नए उद्योग लगाने को लेकर सरकार की तरफ से कई योजनाएं लाई जा रही हैं. अगर राज्य में नए उद्योग स्थापित होंगे तो उसके लिए बिजली की भी जरूरत होगी. ऐसे में बिहार के नए इंडस्ट्रियों के लिए 838 मेगावाट की बिजली रिजर्व की गई है. जानकारी के मुताबिक, सरकार की तरफ से उद्योगपतियों के साथ समझौते भी किए जा रहे हैं.

क्या कहना है बिजली कंपनी के अधिकारियों का?
बिजली कंपनी मुख्यालय के अधिकारियों की माने तो, इस साल लगभग 9602 मेगावाट की बिजली डिमांड की जा सकती है. राज्य में लगने वाले इंडस्ट्रियों को स्मूथ बिजली मिले, इसको लेकर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन का विस्तार करने पर ध्यान दिया जा रहा है. अभी की बात करें तो, 175 ग्रिड उपकेंद्रों से बिजली सप्लाई के लिए 21,165 किलोमीटर का ट्रांसमिशन नेटवर्क है. इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 16 नए ग्रिड उपकेंद्र का निर्माण जारी है.

2026-27 में बिजली की उपलब्धता
जानकारी के मुताबिक, ज्यादातर बड़े इंडस्ट्रियों में 33 केवी और 11 केवी पर बिजली की सप्लाई की जाती है. इसके लिए ट्रांसमिशन लाइन की नेटवर्क क्षमता को बढ़ाने पर काम किया जा रहा है. इसके साथ ही साल 2025-26 में बिजली की उपलब्धता 9237 मेगावाट थी, जो साल में 2026-27 में बढ़कर 10,440 मेगावाट हो गई है.

इन जगहों से मिल रही ज्यादातर बिजली
जिन जगहों से बिजली की मुख्य रूप से आपूर्ति हो रही है, उनमें एनटीपीसी (6996 मेगावाट), लखीसराय के कजरा (185 मेगावाट) और चौसा भी शामिल है. राज्य में बिजली की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चौसा बिजली घर के दूसरे यूनिट को चालू किया जाएगा. इसके साथ ही नवीनगर स्टेज-2 के तीन नए यूनिट का निर्माण और पीरपैंती में भी निर्माण कार्य तेजी से जारी है. 

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