पाञ्चजन्य के अभ्युदय मध्यप्रदेश, इंडस्ट्री लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026 में की सहभागिता
भोपाल
विकसित भारत और विकसित मध्यपप्रदेश बनाने में एमएसएमई सेक्टर की महती भूमिका होगी। इसी सेक्टर से हम चीन की चुनौतियों का सफलता पूर्वक सामना कर पायेगें। पुरातन काल में भी छोटे-कुटीर उद्योगों के कारण ही भारत सोने की चिडि़या कहलाता था। इसी को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले दो वर्षो में कई महत्ववपूर्ण कदम उठाये है, जिनके सकारात्मकक परिणाम भी आने लगे है। नई नीतियां बनाई गई है, जिनमें निवेशकों और नवउद्यमियों को अनुदान सहायता से लेकर अन्य कई तरह की रियायतें दी गई है। समागम में आर्गनाइजर के वरिष्ठ सहायक संपादक निशांत कुमार और उद्यमियों के सवालों के जवाब में एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने उक्त बातें कही। मंत्री काश्यप सोमवार को कुशाभऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में पाञ्चजन्य के अभ्युदय मध्यप्रदेश कार्यक्रम में सहभागिता कर रहे थे।
मंत्री काश्यप ने भविष्य की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये मध्यप्रदेश में अनेक नवाचार किये जा रहे हैं, जिनका अनुसरण दूसरे राज्यय भी कर रहे है। ग्लो बल इन्वेस्टर्स समिट के साथ-साथ रीजनल इंडस्ट्रीरयल कॉन्लेकर व किये गये। इनमें स्था नीय उद्यमियों के साथ-साथ बड़े उद्यगपतियों को बुलाकर उनके अनुभव साझा कराये गये। रीजनल कॉन्क्लेव का एक उद्देश्य औद्योगिकरण का विस्तार प्रदेश के आदिवासी बहुल दूर-दराज इलाकों में भी हो सके। शहडोल, मंडला, डिंडोरी, अलीराजपुर के साथ-साथ बुंदेलखण्ड क्षेत्र में भी औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यही नहीं प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुसार महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी ठोस काम कर उसे स्थारयित्व देने के प्रयास हो रहे है। प्रदेश के लगभग एक लाख से अधिक स्वसहायता समूहों को चिन्हित कर उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, उन्हें तकनीकि सहायता भी दी जा रही है। उद्योगों में महिलाओं को 48 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। उनकी सुविधा के लिये फ्लेटेड इंडस्ट्रीयल क्षेत्र निर्मित किये जा रहे है।
एमएसएमई क्षेत्र में वित्तीय समावेशिता बढ़ाने के लिये क्रेडिट गारंटी का विस्तारीकरण किया जा रहा है। बैंकिग सिस्टम को आधुनिक तकनीक से समृद्ध कर सरल और व्यवहारिक बनाया जा रहा है, जिससे उद्यमियों को कर्ज लेने में आसानी हो। एआई को हम चुनौती के बजाय अवसर मानकर उसका लाभ उठाने की दिशा में काम कर रहे है।
एक प्रश्न के उत्तर में मंत्री काश्यप ने बताया कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के बंद होने का प्रतिशत बहुत कम है। पिछले समय में बंद हुए उद्योगों को पुन: प्रारंभ करने के लिये उद्यमियों को हर संभव सहायता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल समिट में प्राप्त 30 लाख करोड़ रूपयों के निवेश प्रस्तावों में से 8 लाख करोड़ के प्रस्ताव धरातल पर आ गये है। इनका या तो भूमि-पूजन हो चुका है या फिर उद्घाटन।
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