जबलपुर
जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) में बनी धनुष तोप ऑपरेशन सिंदूर में धाक जमाने के बाद की मांग बढ़ी है। रक्षा उत्पादन में नए सिरे से कार्य करते हुए निर्माणी छह माह के छोटे से समय में 100 धनुष तोप का नया आधुनिक माउंटेन गन सिस्टम बनाएगा। यह तोप अभी 38 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। इसमें 52 कैलिबर का उपयोग किया गया है।
अब नई तोप 44 से 46 किलोमीटर रेंज कवर करेगी और 45 की जगह 52 कैलिबर में नजर आएगी। निर्माणी ने इसके लिए नया प्लांट विकसित किया है, जहां इसे आकार दिया जाएगा। माउंटेन गन सिस्टम से यह व्हीकल पर कैरी हो सकेगी साथ चारों दिशाओं में घूमकर फायर में सक्षम हो सकेगी। धनुष 155 एमएम 45 कैलीबर की आधुनिक आर्टिलरी गन में एक है। इस आर्टिलरी गन में 81 प्रतिशत पार्ट स्वदेशी है और लक्ष्य 91 प्रतिशत स्वदेशी पार्ट्स का है।
13 सेकंड में तीन फायर
उन्होंने बताया कि इस गन की मारक क्षमता 38 किलोमीटर तक है। यह 13 सेकंड में तीन फायर कर सकती है। फायर करने के बाद गन अपनी पोजिशन चेंज कर करती है। उन्होंने बताया कि आर्टिलरी गन का वजन 13 टन है। उन्होंने इस बात से भी इंकार किया कि यह बोफोर्स का अपग्रेडेड वर्जन है। बोफोर्स तथा धनुष के कुछ फंक्शन सामान्य हैं। यह रात के समय भी लक्ष्य पर निशाना साध सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने कुल 414 गन की मांग की है।
पूरी तरह देश में विकसित
जानकारी के मुताबिक, 1990 में बोफोर्स के बाद अब जाकर कोई बड़ी गन सेना को सौंपी जा रही है। देश में विकसित सबसे बड़ी आर्टिलरी गन धनुष में कई खूबियां हैं। 2012 में इस पर काम शुरू हुआ था। इसमें अपग्रेडेड कम्यूनिकेशन सिस्टम लगाया गया है।
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