सरकारी स्कूल ने प्राइवेट को दी चुनौती, रतलाम के बच्चे बिना बैग आए और 40 तक के पहाड़े याद किए

मध्य प्रदेश राज्य

रतलाम
 सरकारी स्कूलों का जब जिक्र आता है, तब ज्यादातर समय दिमाग में पहली तस्वीर बदहाल व्यवस्था की बनती है लेकिन मध्य प्रदेश के रतलाम में एक ऐसा अनूठा स्कूल है, जो इसके विपरीत एक नजीर पेश कर रहा है. यह स्कूल अपने आप में एक मिसाल है. इसके बारे में यह कहना हरगिज गलत नहीं होगा कि यह सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को मात दे रहा है. स्कूल की अपनी कार्यशैली के चलते इसे ‘समस्या मुक्त विद्यालय’ नाम दिया गया है. यहां के प्रधानाध्यापक ने अपने खर्च पर स्कूल को सजाया-संवारा है. वहीं उनका शिक्षा की गुणवत्ता पर भी खासा फोकस रहता है. हम बात कर रहे हैं रतलाम के जावरा स्थित रूपनगर के सरकारी प्राथमिक स्कूल की.

प्राथमिक स्कूल को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया है. स्कूल में बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ वह तमाम जानकारी मुहैया करवाई जा रही है, जो उनके सर्वांगीण विकास में सहायक है. स्कूल में इस तरह हरियाली छाई हुई है कि एक बार के लिए लगता है कि आप किसी गार्डन में आ गए हों. स्कूल की साफ-सफाई पर बहुत ध्यान दिया जाता है ताकि बच्चे अभी से स्वच्छता के महत्व को समझ सकें और इसे अपने जीवन में अपना सकें.

खाली हाथ स्कूल आते हैं बच्चे
पहली से पांचवीं क्लास तक यह स्कूल पूरी तरह से एक बैगलेस स्कूल है. बच्चे घर से बैग लेकर स्कूल नहीं आते हैं ताकि उनके नाजुक कंधों पर वजनी बोझ न पड़े. स्कूल में पढाई के साथ-साथ होमवर्क भी करवाया जाता है. बच्चों की यूनिफॉर्म पूरी तरह से व्यवस्थित है. इन नन्हे-मुन्ने स्टूडेंट्स की छोटी-छोटी बातों पर पूरा ध्यान दिया जाता है ताकि वे भी अच्छी बातें सीख सकें.

बच्चों को 40 तक के पहाड़े मुंहजबानी याद
स्कूल से प्रधानाध्यापक की मेहनत का ही यह नतीजा है कि उन्होंने इस सरकारी स्कूल की तस्वीर बदल दी. यहां बच्चों को 40 तक के पहाड़े मुंहजबानी याद हैं. जावरा के रूपनगर का यह सरकारी स्कूल रतलाम ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में मिसाल पेश करता नजर आ रहा है.

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