भोपाल.
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि दंत चिकित्सा स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है। अच्छा मौखिक स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रशिक्षित दंत चिकित्सक दंत चिकित्सा क्षेत्र में वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल एलएन मेडिकल कॉलेज भोपाल में "इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ग्लोबल डेंटिस्ट्री–2026" के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि यह पहल "ब्रेन ड्रेन" नहीं बल्कि "ग्लोबल गेन" का उदाहरण है। सही मार्गदर्शन , पारदर्शी प्रक्रिया और नैतिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भारतीय डेंटिस्ट वैश्विक मंच पर अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं तथा देश की प्रतिष्ठा को सशक्त बना सकते हैं।
सम्मेलन में पहली बार भारत में यूके डेंटल भर्ती एवं प्लेसमेंट पर संरचित मंच प्रस्तुत किया गया। ओआरई, एलडीसी, एमएफडीएस परीक्षाओं, जनरल डेंटल काउंसिल (जीडीसी) रजिस्ट्रेशन, वीज़ा/स्पॉन्सरशिप प्रक्रिया, यूके क्लिनिकल स्टैंडर्ड्स, रोगी सुरक्षा और प्रोफेशनल एथिक्स पर विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को गलत सूचना और फर्जी एजेंसियों से बचने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया समझाई गई। सम्मेलन में भारत एवं यूके की आय संभावनाओं की तुलनात्मक जानकारी भी प्रस्तुत की गई। यूके से आए विशेषज्ञों द्वारा वन-टू-वन मार्गदर्शन, पैनल डिस्कशन और दो दिवसीय सीपीडी एवं पर्सनलाइज्ड क्लिनिक का आयोजन किया जायेगा।
कार्यक्रम में डेंटल सर्जन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. चंद्रेश शुक्ला, डॉ. अनुपम चौकसे, धर्मेन्द्र गुप्ता, सहित दंत चिकित्सा विशेषज्ञ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। लंदन से आए विशेषज्ञ डॉ. रूथ चेसमोर-होस्कर, डॉ. गौरी प्रधान, डॉ. शिवानी भंडारी, डॉ. दलिप कुमार, विलियम नील कार्माइकल एवं डॉ. टिमोथी ओ’ब्रायन ने प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दंत छात्र-छात्राओं, इंटर्न्स, प्रैक्टिसिंग दंत चिकित्सकों एवं फैकल्टी सदस्यों ने सहभागिता की और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपने कैरियर संबंधी प्रश्नों के समाधान प्राप्त किए।
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