विक्रम भट्ट–श्वेतांबरी भट्ट को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दी नियमित जमानत

राज्य

जयपुर

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन जजों की पीठ ने बुधवार को फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को नियमित जमानत दे दी। यह जमानत राजस्थान के उदयपुर के भूपालपुरा थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 213/2025 के मामले में दी गई है।

मामला एलएलपी कंपनियों के जरिए किए गए फिल्म निर्माण समझौतों से जुड़ा है। आरोप है कि प्रस्तावित फिल्म परियोजनाओं के नाम पर करीब 44.7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, जालसाजी और धन के दुरुपयोग किया गया।

एसएलपी (क्रिमिनल) संख्या 2647/2026 की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया, जिसमें कहा गया कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद सुलझाना चाहते हैं। शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि समझौते की कोशिश के लिए आरोपियों को अंतरिम जमानत देने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद अदालत ने दोनों को नियमित जमानत दे दी।

संविदात्मक काम पूरे करने की इच्छा जताई थी
विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत को बताया कि दोनों पक्ष विवाद खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम जमानत मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने ईमेल भेजकर फिल्म निर्माण से जुड़े संविदात्मक काम पूरे करने की इच्छा जताई थी। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने जमानत का विरोध किया। उनका कहना था कि जांच अभी जारी है और कई गवाह मुंबई में हैं। ऐसे में आरोपियों की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब दोनों पक्ष समझौते के इच्छुक हैं तो उन्हें इसका अवसर दिया जाना चाहिए। अदालत ने मामले को सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र भेज दिया ताकि आपसी समाधान की कोशिश की जा सके। अदालत ने यह भी साफ किया कि जांच पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। जांच एजेंसी कानून के अनुसार अपनी कार्रवाई जारी रख सकती है। यानी जमानत मिलने के बावजूद आपराधिक जांच पहले की तरह चलती रहेगी।

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