छबिलाल राजेंद्रग्राम
इन दिनों राजेंद्र ग्राम में पागल आवारा घूम रहे इंसानों के देखभाल के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहे हैं वा इनको पूछताछ करने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति ही नहीं है कि ये लोग कहां रहते हैं क्या करते हैं और क्या खाते पीते हैं रात कैसे काटते है इनका ठिकाना वा जानकारी लेने वाले शासन प्रशासन भी नही दिखाई पड़ रहे है।
अगर कोई भी घटना होती है तो जिम्मेदार कोन होगा शासन प्रशासन वा पंचायत कर्मचारी कौन होगा अगर माना जाए तो राजेंद्र ग्राम में लगभग कम से कम दो या तीन आवारा पागल घूम रहे हैं जो कि ये कहा के है किसी को पता ही नही है इनको कमसे कम पूछ तो लिया जाता की कहां से आए हो क्या नाम है गांव का क्या नाम है माता-पिता का क्या नाम है और जिससे इनको उनके परिजनों तक पहुंचाया जा सके लेकिन पूछने वाला ही नहीं है कोई जबकि कहा जाए तो पूरे पुष्पराजगढ़ के अधिकारी कर्मचारी सहित आम नागरिक वा दुकानदार पूरे सप्ताह आते जाते इन्हीं का दर्शन करने में लगे रहते हैं ऐसा हो गया है की राजेंद्रग्राम तीर्थ स्थल है जिनके देवता यही पागल ही है ।और आते जाते राहगीर दर्शन करते रहते हैं।
इन पागलों का हुलिया देखकर डरावना सा लगता है कोई पागल कपड़ा पहना है कोई पागल नंगा घूम रहा है पर किसी को इन पागल व्यक्तियों के ऊपर एक भी दया नाम की चीज नहीं है। आते जाते राहगीरों को कहना है की इन सभी पागलों का नाम ठिकाना जानकर ठिकाना लगाने की सख्त जरूरत है
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