न्याय नहीं मिलने से टूटा मजदूर, फांसी लगाकर दी जान; गांव में सड़क जाम कर प्रदर्शन

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रतलाम

जावरा के औद्योगिक थाना अंतर्गत ग्राम हरियाखेड़ा में एक मजदूर युवक द्वारा संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना पर बड़ी संख्या में आदिवासी समाज एकत्रित हो गया और जाम लगा दिया। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार और जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशू निनामा भी मौके पर पहुंचे और स्वजनों से चर्चा कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

मामले में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। लापरवाही बरतने पर एसपी ने थाने के एएसआई आशीष मांगरिया को लाइन अटैच किया है। जानकारी के अनुसार मृतक लक्ष्मीचंद्र पुत्र कनीराम भील गांव की पानी की टंकी पर रस्सी का फंदा बनाकर झूल गया। सुबह घटना की जानकारी मिलते ही गांव में आक्रोश फैल गया।

सूचना पर औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की सहायता से शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम हेतु जावरा के शासकीय अस्पताल भिजवाया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। ग्रामीणों के अनुसार मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें ग्राम सरपंच जितेंद्र पाटीदार सहित तीन लोगों के नाम लिखे बताए जा रहे हैं।

आरोप है कि फांसी लगाने से पहले युवक ने टंकी की सीढ़ियों पर आरोपितों के नाम तथा पुलिस नहीं सुनती लिख दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि बाद में सरपंच या पुलिस के कहने पर गांव के चौकीदार द्वारा वहां लिखे नाम मिटा दिए गए, जिससे मामला संदेह के घेरे में आ गया है। बताया जा रहा है कि लक्ष्मीचंद्र गांव के सरपंच जितेंद्र पाटीदार के खेत पर मजदूरी करता था। स्वजन का आरोप है कि 11 फरवरी की रात करीब 1 बजे वह खेत में फसल को पानी दे रहा था, तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और उसके साथ मारपीट की।

इसके बाद उल्टा मृतक पर ही चोरी का आरोप लगाकर उसे थाने में बंद करा दिया गया। जमानत पर छूटने के बाद युवक ने सरपंच एवं उनके परिवार के तीन लोगों के विरुद्ध औद्योगिक क्षेत्र थाने में आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। एएसपी विवेक कुमार लाल ने बताया कि तीन आरोपितों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रकरण दर्ज किया है। इनमें सरपंच जितेन्द्र पाटीदार, लोकेश पाटीदार तथा पुरुषोत्तम पाटीदार है। जीतेंद्र को राउंडअप कर लिया गया है। शेष की तलाश कर रहे है।
एसपी के पास भी पहुंचा था मृतक

स्वजन के अनुसार मृतक ने रतलाम एसपी कार्यालय में भी शिकायत भेजी थी, लेकिन सुनवाई नहीं होने से वह लगातार तनाव में था। 12 फरवरी को दिए गए लिखित आवेदन में लक्ष्मीचंद्र ने आरोप लगाया था कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया, सरपंच पक्ष एवं पुलिस द्वारा मारपीट की गई तथा जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया था कि थाने में रातभर मारपीट कर उस पर दबाव बनाया गया कि वह किसी अन्य का नाम ले ले। उसने गंभीर धमकियां मिलने की भी बात लिखी थी।

ग्रामीणों का कहना है कि टंकी के चढ़ाव पर सरपंच तथा ऊपर पुलिस नहीं सुनती स्पष्ट लिखा हुआ दिखाई दे रहा था, जिससे गांव में आक्रोश व्याप्त हो गया। उल्लेखनीय है कि हरियाखेड़ा के सरपंच जितेंद्र को पूर्व में ईओडब्ल्यू द्वारा

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