जीविका दीदियों को होगा फायदा, बिहार के हर प्रखंड को मिलेंगे 16 लाख रुपए

राज्य

पटना.

बिहार सरकार की तरफ से जीविका दीदियों के लिए खास फैसला लिया गया है. राज्य में जीविका की सीएलएफ (कम्युनिटी लेवल फेडरेशन) को इस साल में आयकर में 67 करोड़ रुपए से अधिक राशि की छूट मिली है. ये राशि जीविका दीदियों के रोजगार सृजन और पूंजी में काम आएगी. राज्य के हर प्रखंड में तीन-तीन सीएलएफ गठित हैं. ये सीएलएफ उत्पादक कंपनी चलाती हैं. कृषि बैंक का संचालन करती हैं.

रोजगार के लिए जीविका दीदियों को पूंजी उपलब्ध करवाती हैं. 67 करोड़ रुपए की मिली छूट सीएलएफ में आवंटित हो जाएगी. इससे सीएलएफ अपने काम का दायरा बढ़ाएगी. राज्य में 1684 सीएलएफ हैं. 67 करोड़ की इस राशि से हर सीएलएफ को लगभग 5 लाख 45 हजार 158 रुपए की अतिरिक्त मजबूती प्रदान होगी. इस हिसाब से हर प्रखंड में लगभग 16 लाख रुपए की अतिरिक्त सहायता जीविका दीदियों को प्रदान हो सकेगी.

इतने परिवार को होगा फायदा
जानकारी के मुताबिक, जीविका के 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह हैं, जिसमें एक करोड़ 40 लाख परिवार जुड़े हुए हैं. शहरी इलाकों में भी 41,477 स्वयं सहायता समूह गठित की गई है. 73 हजार 515 ग्राम संगठन हैं. टोटल 1684 क्लस्टर स्तरीय संघ हैं. इन संघों से जुड़े एक करोड़ 40 लाख परिवारों को इस राशि से अतिरिक्त सहायता प्रदान होगी.

सहकारिता अधिनियम में पंजीकरण
सीएलएफ का पंजीकरण सहकारिता अधिनियम (को-ऑपरेटिव एक्ट) के तहत कराया जा रहा है. इसमें एक हजार से अधिक सीएलएफ का पंजीयन सहकारिता अधिनियम के तहत किया जा चुका है. उन्हें आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80पी के तहत ये छूट मिली है.
धारा 80पी के तहत सहकारी संस्थाओं को आयकर में कटौती का प्रावधान है. इसी प्रावधान का लाभ उठाते हुए सीएलएफ ने आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल कर छूट प्राप्त की. समय पर डॉक्यूमेंटेशन और लेखा-जोखा दुरुस्त रखने के कारण यह लाभ संभव हो सका.

महिलाओं को होगी ये आसानी
इस अतिरिक्त राशि से सीएलएफ अपनी कार्यशील पूंजी को मजबूत कर सकेंगी. महिला स्वयं सहायता समूहों को समय पर ऋण वितरण में आसानी होगी और नए आय सृजन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. कई सीएलएफ दुग्ध उत्पादन, सब्जी उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं. पूंजी बढ़ने से इन गतिविधियों का विस्तार संभव होगा. साथ ही, ग्रामीण स्तर पर छोटे उद्यमों को भी सहयोग मिलेगा. इससे जीविका दीदियों की आमदनी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी.

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