खरगोन हादसे के पीड़ितों को न्याय, अदालत ने मुआवजे पर लगाई मुहर

मध्य प्रदेश राज्य

खरगोन

जिला मुख्यालय के चतुर्थ अतिरिक्त मोटर दावा अधिकरण ने तीन वर्ष पहले बिस्टान थाना क्षेत्र के अंजनगांव के समीप ईंधन से भरे टैंकर के पलटने के बाद विस्फोट होने के चलते 15 लोगों की मृत्यु और 10 के घायल होने के मामले में बीमा कंपनी को करीब 4 करोड़ रुपए हर्जाना देने के निर्देश दिए हैं। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अरुण त्रिपाठी ने बताया कि जज मुकेश नाथ ने फैसला सुनाते हुए मृतक 15 लोगों के परिजनों व 10 घायलों को 3 करोड़ 30 लाख रुपए दिए जाने के निर्देश दिए हैं। यह राशि ब्याज समेत करीब 4 करोड़ रुपए होती है।
15 की मौत और 10 हुए थे घायल

उन्होंने बताया कि खरगोन जिले के बिस्टान थाना क्षेत्र के गढ़ी बिलाली रोड पर स्थित अंजनगांव के समीप मोड़ पर 26 अक्टूबर 2022 को पेट्रोल और डीजल ले जा रहे टैंकर पलट गया था। इस टैंकर में अचानक हुए विस्फोट के चलते पास के ही हैंडपंप से पानी भर रहे कई लोग प्रभावित हो गए थे। घटना के चलते 15 लोगों की मृत्यु हो गई थी जबकि 10 लोग घायल हो गए थे। अधिकरण के समक्ष 25 पृथक-पृथक केस मामले फरवरी 2023 में दर्ज हुए थे, और मामले में करीब 100 लोगों की गवाही हुई।

स्थाई अपंगता और चालक की घोर लापरवाही पर न्यायालय की टिप्पणी

उन्होंने बताया कि दुर्घटना में प्रभावित तीन लोग स्थाई अपंगता का शिकार हो गए और वह जीवन भर धूप में काम नहीं कर पाएंगे। शेष 7 घायल रिकवर कर गए थे। उन्होंने बताया कि अधिकरण ने माना कि टैंकर चालक ने समय रहते ज्वलनशील ईंधन के खतरे के बावजूद प्रशासनिक मदद नहीं ली और लोगों को संभावित घटना के मद्देनजर दूर नहीं किया, और यह लापरवाही उनके लिए बेहद हानिकारक सिद्ध हुई। उन्होंने बताया कि टैंकर में अग्निशमन उपकरण भी नहीं था। घटना के वीडियो फुटेज भी ट्रायल के दौरान प्रस्तुत किए गए।

बीमा कंपनी के तर्कों को कोर्ट ने किया खारिज

उन्होंने बताया कि बीमा कंपनी का तर्क था कि यह ग्रामीणों की खुद की लापरवाही है और वह घटना के समय पेट्रोल-डीजल लूटने गए थे और विस्फोट के चलते दुर्घटना का शिकार हो गए। बीमा कंपनी ने बताया कि ड्राइवर ने लोगों को पास आने से मना किया था। हालांकि अधिवक्ता त्रिपाठी ने बताया कि बीमा कंपनी इन सब बातों को प्रमाणित करने में असफल रही।

वाहन गति में न होने पर भी चालक जिम्मेदार

उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में यह अपने तरीके का पहला निर्णय है जिसमें वाहन के गति में नहीं होने के बावजूद हुई दुर्घटना में पेनल्टी अधिरोपित की गई है। यह सुप्रीम कोर्ट के 2013 के न्याय दृष्टांत के मुताबिक फैसला आया है जिसमें वाहन के मोशन में न रहने के बावजूद चालक की लापरवाही को घटना के लिए उत्तरदायी माना गया। इस मामले में वाहन चालक व अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया था। उक्त प्रकरण फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।

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