बढ़ते अमेरिका-ईरान तनाव के बीच युवाओं का गुस्सा फूटा, सड़कों पर उतरे Gen Z

दुनिया

ईरान
ईरान में हुए बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों को क्रूर दमन के बाद कुचल दिया गया था, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई। अब 40वें दिन (चेहलम) पर शनिवार को छात्रों ( Gen Z) ने फिर से सड़कों और विश्वविद्यालयों में उतरकर मौलवी शासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अमीर कबीर और बेहेश्ती जैसे प्रमुख कैंपसों में सैकड़ों छात्रों ने 'तानाशाह मुर्दाबाद', 'खामेनेई मुर्दाबाद', 'हत्यारा नेता' और 'बी शराफ' (शर्मनाक) जैसे नारे लगाए। ये प्रदर्शन दिसंबर 2025 से शुरू हुए आर्थिक संकट, महंगाई और असंतोष से उपजे बड़े आंदोलन की निरंतरता हैं, जो जनवरी 2026 में चरम पर पहुंचे थे। सुरक्षा बलों और बसिज मिलिशिया ने इन नए प्रदर्शनों को भी बलपूर्वक दबाने की कोशिश की, जिससे झड़पें हुईं और घायलों की खबरें आईं।

वायरल हो रहे वीडियो
सोशल मीडिया पर हो रहे वीडियो में तेहरान के प्रमुख इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय में भारी भीड़ को एक भरे हुए इलाके में आपस में भिड़ते हुए देखा जा सकता है। कथित तौर पर लोगों को फारसी में बी शराफ यानी शर्मनाक चिल्लाते हुए सुना गया। ईरान इंटरनेशनल द्वारा साझा किए गए फुटेज में तेहरान के शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सरकार विरोधी नारे लगाते हुए बड़ी भीड़ दिखाई दी। समाचार एजेंसी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी अर्धसैनिक इकाइयों को भेजा गया, जिसके कारण विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक कुचल दिया गया। बाद में फार्स समाचार एजेंसी ने विश्वविद्यालय में हुई झड़पों में घायलों की सूचना दी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक वीडियो में कथित तौर पर शरीफ विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारियों की कतारें दिखाई दे रही हैं, जो सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को 'हत्यारा नेता' बताकर उनकी निंदा कर रहे हैं और ईरान के अपदस्थ शाह के निर्वासित पुत्र रजा पहलवी से नया सम्राट बनने का आग्रह कर रहे हैं। मानवाधिकार समूह HAALVSH द्वारा जारी वीडियो के अनुसार, तेहरान में बेहेश्ती और अमीर कबीर विश्वविद्यालयों तथा पूर्वोत्तर में मशहद विश्वविद्यालय में भी प्रदर्शनों की खबरें आईं। देश के पश्चिमी शहर अब्दानन में, जो विरोध प्रदर्शनों का गढ़ माना जाता है, मानवाधिकार समूह हेंगाव और सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, एक कार्यकर्ता शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद प्रदर्शनकारियों ने 'खामेनेई मुर्दाबाद' और 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगाए।

ईरान में विरोध प्रदर्शन और अमेरिका के साथ तनाव
आर्थिक दबाव के लंबे दौर के कारण दिसंबर में अशांति शुरू हुई, लेकिन यह बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गई, जिसे सुरक्षा बलों ने हिंसक कार्रवाई से दबा दिया। धार्मिक नेतृत्व का कहना है कि 3000 से अधिक लोग मारे गए, लेकिन उनका दावा है कि हिंसा ईरान के दुश्मनों द्वारा किए गए 'आतंकवादी कृत्यों' का परिणाम थी। हालांकि, अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (एचआरएएनए) ने इस दमनकारी कार्रवाई में 7000 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जिनमें से अधिकांश प्रदर्शनकारी थे, हालांकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

वहीं, ईरानी अधिकारियों ने पहले प्रदर्शनकारियों की आर्थिक चिंताओं की वैधता को स्वीकार किया, लेकिन जैसे ही प्रदर्शन खुले तौर पर सरकार के खिलाफ हो गए, उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल पर 'दंगों' को भड़काने का आरोप लगाया। इस कार्रवाई के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की धमकी दी, हालांकि बाद में उनका ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित हो गया, जिससे पश्चिमी सरकारों को डर है कि इसका उद्देश्य बम बनाना है। अमेरिका और ईरान ने हाल ही में ओमान की मध्यस्थता में संभावित समझौते पर बातचीत फिर से शुरू की है, लेकिन वाशिंगटन ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति भी बढ़ा दी है, और दो विमानवाहक पोत, जेट और हथियार भेजे हैं।

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