बॉर्डर पर बढ़ी हलचल, 3 दिन तक सील रहेगी अंतरराष्ट्रीय सीमा—सुरक्षा एजेंसियां क्यों सतर्क?

राज्य

महराजगंज

आगामी नेपाली संसदीय चुनावों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने और सीमा पार से होने वाली अवांछनीय गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए भारत और नेपाल के शीर्ष अधिकारियों ने एक निर्णायक समन्वय बैठक की। इस उच्च स्तरीय मंथन में दोनों देशों ने साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया।

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय नेपाल में प्रस्तावित संसदीय चुनावों को लेकर लिया गया। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत 2 मार्च 2026 की मध्यरात्रि से 5 मार्च 2026 की मध्यरात्रि तक भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा को पूरी तरह सील रखा जाएगा। इसका उद्देश्य चुनाव के दौरान संदिग्ध आवाजाही, अवैध घुसपैठ और सुरक्षा जोखिमों को शून्य करना है।

प्रमुख उपस्थिति एवं अध्यक्षता
नेपाल के मोरंग जिला स्थित विराटनगर में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता युवराज कटेल ने की। इसमें दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक व सुरक्षा प्रमुखों ने हिस्सा लिया। भारत की तरफ से बिहार के सुपौल, किशनगंज और अररिया जिलों के जिला पदाधिकारी तो वहीं नेपाल पक्ष से मोरंग, झापा और सुनसरी जिलों के मुख्य जिला अधिकारी, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और राष्ट्रीय जांच विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

अपराध और तस्करी पर 'जीरो टॉलरेंस'
बैठक में केवल चुनावी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा मुद्दों पर भी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। दोनों पक्षों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर संयुक्त कार्रवाई तेज करने पर सहमति जताई:

अवैध नेटवर्क पर प्रहार: सीमा पार आतंकवाद, हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और जाली मुद्रा (FICN) के नेटवर्क को ध्वस्त करना।

मानव तस्करी: महिलाओं और बच्चों की तस्करी जैसे संवेदनशील अपराधों पर कड़ी निगरानी।

अतिक्रमण नियंत्रण: ‘नो मैन्स लैंड’ (दशगजा क्षेत्र) में बढ़ते अतिक्रमण की जांच और अनधिकृत रास्तों से होने वाली आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध।

खुफिया सूचनाएं: संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी साझा करने के लिए एक त्वरित सूचना तंत्र को और अधिक सक्रिय करना।

शांति और मित्रता की प्रतिबद्धता
अधिकारियों ने दोहराया कि भारत और नेपाल के बीच की खुली सीमा पारंपरिक मित्रता का प्रतीक है, लेकिन इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों का बेहतर तालमेल अनिवार्य है। वर्तमान में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं, ताकि चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराया जा सके।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry