कनाडा
भारत के कनाडा में उच्चायुक्त Dinesh Patnaik ने उम्मीद जताई है कि भारत और कनाडा अगले एक वर्ष के भीतर व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह बयान कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले आया है। दोनों देशों ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हुए G20 Summit के दौरान बातचीत को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, CEPA का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। भारत-कनाडा के बीच CEPA पर बातचीत 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन कई बार रुक गई। अब बदलते वैश्विक हालात और रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए दोनों देश तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। दिनेश पटनायक ने कहा कि दोनों देशों ने पिछले कुछ वर्षों में कई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं, इसलिए अनुभव के आधार पर समझौता जल्दी संभव है।
किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?
प्रधानमंत्री कार्नी की यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों पर विशेष जोर रहने की संभावना है:
यूरेनियम और ऊर्जा सहयोग
महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
डिजिटल व्यापार
कृषि और निवेश
नई दिल्ली और मुंबई में वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक नेताओं से बैठकें प्रस्तावित हैं।
पूरक अर्थव्यवस्थाएं, कम प्रतिस्पर्धा
पटनायक ने कहा कि कनाडा कमोडिटी निर्यातक देश है, जबकि भारत बड़ा उपभोक्ता बाजार है। इसलिए दोनों देशों के उद्योगों में सीधी प्रतिस्पर्धा कम है और सहयोग की संभावनाएं अधिक हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फाइटोसैनिटरी नियम, सरकारी खरीद या कस्टम प्रक्रियाएं जैसे सामान्य मुद्दे इस बार बड़ी बाधा नहीं बन रहे। CEPA के तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, कृषि, डिजिटल कॉमर्स और हाई-टेक क्षेत्रों में व्यापक सहयोग का रास्ता खुलेगा। यह समझौता वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और कनाडा के आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देगा और दोनों देशों को रणनीतिक रूप से करीब लाएगा।
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